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UPSC Compulsory Language PYQs 2013 | Vaidra | Vaidra
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Compulsory Language UPSC PYQ 2013

10 questions from the UPSC 2013 examination. Showing a preview of 3 below — generate a full practice test to solve the rest.

3 questions

1Mediummains60 marks
Compulsory Language
निम्नलिखित गद्दांश का संक्षेपण एक तिहाई शब्दों में लिखिए। शीर्षक देना अनिवार्य नहीं है। (शब्द-सीमा के अंतर्गत संक्षेपण न करने पर अंक काटे जा सकते हैं) :-
समकालीन विश्व में, ‘राष्ट्र’ और ‘राष्ट्र-राज्य’ की अवधारणा के बीच में व्यापक मतभेद है। ‘राष्ट्र-राज्य’ को परिभाषित करना अपेक्षाकृत आसान है, वे विश्व राजनीतिक संगठन की आधारभूत इकाइयां हैं। वे प्रायः प्रभुसत्ता-सम्पन्न राज्य के समरूप हैं। वे वह इकाइयां हैं जिनके पास संयुक्त राष्ट्र में सीट है, अंग्रेजी में, आमतौर पर उन्हें ‘देश’ नाम दिया गया है। यह सुविधा-जनक होगा यदि हम उनको ‘राज्य’ के नाम से सरल बना दें, लेकिन दुर्भाग्यवश यह नाम कुछ राष्ट्र-राज्यों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है जो वर्णित इकाइयों के राष्ट्र-राज्यों से छोटी हैं।
राष्ट्र-राज्य और प्रभुसत्ता राज्य को बराबर करना लुभाने वाले हैं, लेकिन यह आधुनिक जगत की अस्थिर प्रकृति की प्रभुसत्ता हेतु भ्रामक होगा। असल में, सभी राष्ट्र-राज्यों ने अपनी प्रभुसत्ता का कुछ हिस्सा अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों को समर्पित कर रखा है, यहाँ यू एन (UN) का अच्छा उदाहरण है- राष्ट्र-राज्यों से अधिकार तो वो लेता है, लेकिन देता नहीं। राज्यों के बीच व्यवहार में यहाँ शक्ति के जटिल समझौते और सम्बन्ध होते हैं। एक छोर पर, यह कुछ बड़े राज्यों को व्यापक शक्ति देता है। दूसरे छोर पर, कई छोटे राज्य, स्पष्ट रूप से शक्तिशाली पड़ोसियों या अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के संरक्षण के नीचे हैं और असलियत में उन्हें कई क्षेत्रों में स्वतन्त्रातापूर्वक कार्य करने की कोई गुंजाइश नहीं है।
अधिकांश राष्ट्र-राज्य खुद को ‘राष्ट्र’ के रूप में वर्णित करते हैं, इसलिए हम सरल रूप से उन्हें उनके कहे के अनुसार क्यों नहीं लेते और कहें कि राष्ट्र-राज्य और राज्य एकरूप हैं? यह संभव नहीं है क्योंकि यह भिन्न व्यवस्था का सूक्ष्मीकरण है। कानूनी रूप से, एक राष्ट्र-राज्य एक परिभाषित सत्ता है, एक राष्ट्र एक जनसमुदाय है। जबकि आधुनिक जनसमुदाय, जो सामान्यतः खुद को राष्ट्र के साथ राष्ट्र-राज्य के फैलाव में लाने का आकांक्षी होता है, राष्ट्र की वह परिभाषा, जो यह अपेक्षित करती है कि वह अपने राष्ट्र-राज्य पर प्रभुत्व स्थापित करे, भी प्रतिबन्धक है। अधिकांश टिप्पणीकार सहमत होंगे कि पूर्ववर्ती सोवियत यूनियन के गणराज्यों के बहुसंख्यक जनसमुदाय, जैसे कि जॉर्जीयंस, लूथियानन्स और उक्रेनियन्स स्वतन्त्राता प्राप्ति से पूर्व राष्ट्र थे और वह जनसमुदाय, जो अच्छी तरह से परिभाषित प्रादेशिक क्षेत्र थे, जैस स्कॉटलेण्ड, वहाँ के बहुसंख्यक समझते हैं कि उन्हें भी उसी तरह राष्ट्र का दर्जा मिलना चाहिए। थोड़ी-सी अलग अभिव्यक्ति देते हुए, स्वायत्तता या स्वतन्त्राता की आकांक्षा करना पर्याप्त है। यद्यपि उपरी तौर से राजशासन-व्यवस्था से साम्य रखते हुए आधुनिक राष्ट्र-राज्य काफी पुराने हैं, दस शताब्दी वर्ष पूर्व पीछे जाते हुए, विश्व के कुछ हिस्सों में, जैसे कि चीन, भारत और भूमध्यसागरीय प्रवाह में इन बहुत पुरानें संगठनों की साधारण राज्यक्षेत्र के रूप में उत्पति थी, जिसकों एक सभ्यसमाज नियंत्राण करने में समर्थ था।
2Mediummains
Compulsory Language
Complete each of the following language and grammar tasks as directed:
3Mediummains
Compulsory Language
निम्नलिखित गद्दांश का अंग्रेजी में अनुवाद कीजिएः-
पैसे को किसी एसी चीज से परिभाषित किया जा सकता है जो खरीदारी से किसी साधन या किसी अन्य प्रकार के भुगतान को बदलकर रख दिया, जिसकी प्रक्रिया देनदार हेतु काफी असुविधाजनक होती थी। क्योंकि जिस वस्तु को बदला जा रहा था, उसकी कीमत का उस वस्तु से मूल्य निर्धारण करना काफी कठिन होता था। और फिर दोनों पक्षों को - एक विनिमयकर्त्ता के रूप में - इस बात के लिए राजी होना पड़ता था कि दूसरा पक्ष अदला-बदली के रूप में आगे बढ़कर जो दे रहा है, उसे वह स्वीकार करे। पैसे ने विशिष्टीकरण और श्रम-विभाजन में सहायता प्रदान की, जो कि उत्पादन का बड़े पैमाने पर आधार है। पैसा कोई भी पदार्थ या कानूनी रूप से स्थापित कोई चीज या प्रथा हो सकती है लेकिन उसका एक अनिवार्य अभिलक्षण यह है कि उसे शीघ्रता से और व्यापक रूप से स्वीकृत होना चाहिए। आदिम समुदायों में कुछ चीजें, जैसे कि मवेशी, सीपियाँ, चावल और चाय का प्रयोग होता था किंतु आधुनिक सभ्य-राष्ट्र धातु या कागज को स्थिर रूप में काम में लाते हैं। सिक्के या नोट्स के रूप में, ये अधिकतर उन विशेषताओं से सम्पन्न होते हैं जो कि एक पैसा-सामग्री में वांछनीय है, यथा-सुवाहृता, स्थिरता, लक्षण में एकरूपता और स्वीकार्यता। धातुएँ मुख्यतः सोना, चांदी, तांबा और निकल के रूप में प्रयुक्त होती हैं । नोट्स कई भिन्न प्रणालियों में जारी किए जाते हैं। मानक पैसे और सांकेतिक पैसे में एक महत्वपूर्ण भिन्नता है। पहला एक निर्धारित (मानक) मूल्य से संघटित है जिससे किसी वस्तु के साथ अन्य की तुलना, उसके मूल्य को मापने हेतु की जाती है। मानक पैसे का मूल्य उसमें विद्यमान सामग्री पर निर्भर करता है, जबकि सांकेतिक पैसे का, जैसे नोट्स के संदर्भ में मूल्य कानून या प्रथा द्वारा निर्धारित होता है, उसके आन्तरिक मूल्य की परवाह किए बिना।

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