भारतीय सेना जल्द ही अपनी पुरानी MBTs — रूसी‑उत्पत्ति T‑72 and T‑90 — Vehicle Factory Jabalpur में समर्पित ओवरहॉल प्लांट के उद्घाटन के बाद रीफ़र्बिश करने की नई क्षमता प्राप्त करेगी। रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने 27 August 2026 को भूमि पूजा की, जिससे ₹472‑crore PIL‑based “T‑Series Tanks Overhaul Project” की शुरुआत हुई।
मुख्य विकास
- Vehicle Factory Jabalpur में AVNL द्वारा निर्मित सुविधा।
- 80 टैंकों की वार्षिक ओवरहॉल क्षमता, HVF Avadi की ~150 टैंकों की क्षमता को पूरक करती है।
- सेना की लगभग 230 टैंकों प्रति वर्ष रीफ़र्बिशमेंट की आवश्यकता को लक्षित करता है।
- परियोजना सैकड़ों घटकों की मांग श्रृंखला बनाने की उम्मीद है, जिससे MSMEs और स्टार्ट‑अप्स को लाभ होगा।
टैंक ओवरहॉल क्या है?
ओवरहॉल एक व्यापक जीवन‑विस्तार प्रक्रिया है जो नियमित सर्विसिंग से आगे जाती है। टैंक को उसकी मूल असेंबली तक हटाया जाता है, प्रत्येक भाग की जांच, मरम्मत या प्रतिस्थापन किया जाता है, और कूलिंग, फ्यूल, लुब्रिकेशन, ट्रांसमिशन और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे महत्वपूर्ण सिस्टम को पुनः मान्य किया जाता है। सीमित शेल्फ‑लाइफ़ वाले घटकों – गैस्केट, सील, बियरिंग, फास्टनर – को नवीनीकृत किया जाता है। हुल में संरचनात्मक दोषों को वेल्ड किया जाता है, और जहाँ संभव हो, आधुनिक सेंसर या कम्युनिकेशन किट्स स्थापित किए जा सकते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
- भारतीय सेना विभिन्न भूभागों में 2,000 से अधिक T‑72/T‑90 टैंकों का संचालन करती है।
- पिछले चार दशकों में, HVF Avadi ने