सारांश: केरल के 94‑वर्षीय विद्वान, S. Parameswaran Nampoothiri ने Supreme Court में एक नई दखल याचिका दायर की है। यह याचिका Sabarimala मंदिर प्रवेश मामले पर लंबित संदर्भ को प्रभावित करने का लक्ष्य रखती है, यह तर्क देते हुए कि संवैधानिक गारंटियों के विरुद्ध जाने वाले रीति‑रिवाजों को समाप्त किया जाना चाहिए।
मुख्य विकास
- Parameswaran Nampoothiri, एक स्वतंत्रता सेनानी, यात्रिक और 15 से अधिक पुस्तकों के लेखक, ने दखल दायर किया क्योंकि संविधान के न तो Article 25 और न ही Article 26 महिलाओं को किसी भी आयु में Sabarimala से बाहर रखने को उचित ठहराते हैं।
- याचिकाकर्ता तर्क देता है कि माहवारी के आधार पर भेदभाव Article 21 की गरिमा धारा का उल्लंघन करता है और संविधान की मूल संरचना में लिंग समानता को कमजोर करता है।
- वे दोहराते हैं कि रीति‑रिवाज, चाहे कितने भी प्राचीन हों, संवैधानिक गारंटियों को अधिलेखित नहीं कर सकते; संविधान सभी नागरिकों के लिए सर्वोच्च रहता है।
- यह दखल Nampoothiri द्वारा तीसरी बार दायर किया गया है (पहले 2016 और 2017 में), पूर्व की याचिका ने न्यूनतम 50% महिला न्यायाधीशों के साथ एक बेंच की मांग की थी।
- एक 9‑न्यायाधीश बेंच वर्तमान में इस संदर्भ को सुन रहा है, जो 2018 के संविधान बेंच के निर्णय से उत्पन्न हुआ, जिसमें 4:1 बहुमत से सभी आयु की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी गई।
महत्वपूर्ण तथ्य
• आयु और योग्यता: Nampoothiri 94 वर्ष के हैं, केरल के नंबूथिरी ब्राह्मण समुदाय से संबंधित हैं, और पारम्परिक रूप से संस्कृत और आयुर्वेद का अध्ययन किया है।
• साहित्यिक योगदान: “Maha Kshetrangaliloode” (महान मंदिरों के माध्यम से) के लेखक, जिसमें Sabarimala पर एक अध्याय शामिल है।
• कानूनी प्रतिनिधित्व: याचिका Adv. Shivangi Ranjan द्वारा तैयार की गई और Adv. Wills Mathews के माध्यम से दायर की गई।
• उल्लेखित संवैधानिक सिद्धांत: याचिकाकर्ता Basic Structure Doctrine का हवाला देता है और जोर देता है कि लिंग समानता इस मूल का हिस्सा है।