भारतीय रुपया 13 मई 2026 को U.S. dollar के प्रति 95.80 के अंतरदिवसीय लो तक गिरा, जो उसकी चौथी लगातार सत्र अवमूल्यन को दर्शाता है। यह गिरावट कच्चा तेल कीमतों में उछाल और पश्चिम एशिया संघर्ष की बढ़ती अनिश्चितता के कारण हुई, जिससे सुरक्षित‑शरणस्थल U.S. dollar की मांग में वृद्धि हुई।
Key Developments
- प्रभावी 13 मई 2026, सरकार ने सोना और चांदी पर आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया, ताकि विदेश में खरीद को रोक सके और विदेशी मुद्रा भंडार की सुरक्षा हो सके।
- इंटरबैंक बाजार में सत्र के दौरान रुपया 21 पैसा गिरा, खुलते ही 95.52 पर, जो पिछले बंद पर 16‑पैसा प्रीमियम था।
- पिछले तीन सत्रों (7 मई 2026 से) में मुद्रा ने कुल 96 पैसा की गिरावट दर्ज की, जो 94.22 से वर्तमान लो 95.80 तक गिरा।
- विश्लेषक Anuj Choudhary (Mirae Asset ShareKhan) ने गिरावट को बढ़ते तेल मूल्यों, महंगाई दबाव और यू.एस.–ईरान शांति वार्ता में “stalemate” के कारण बताया, और स्पॉट रेंज ₹95.45‑₹96.15 का अनुमान लगाया।
- डॉलर इंडेक्स 98.46 तक पहुंचा, 0.29% बढ़ा।
- घरेलू इक्विटी सूचकांक में मामूली बढ़ोतरी: Sensex 79.50 अंक बढ़कर 74,638.74 पर, Nifty 39.50 अंक बढ़कर 23,419.05 पर।
- FIIs ने 12 मई 2026 को ₹1,959.39 करोड़ मूल्य के शेयर बेचे।
- अप्रैल 2026 के रिटेल महंगाई में वृद्धि हुई, जो सोना, चांदी के आभूषण और कुछ रसोई वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी से 3.48% तक पहुंची।