India’s defence sector तेज़ी से विस्तार कर रहा है, फिर भी upgraded Arjun Mk 1A की डिलीवरी पाँच वर्षों से ठप है। यह देरी तकनीकी कमी के कारण नहीं बल्कि नौकरशाही और नीति‑संबंधी बाधाओं की श्रृंखला के कारण है जो देश की defence procurement प्रणाली में कमजोरियों को उजागर करती है।
मुख्य विकास
- 2021 Sep: Defence Ministry ने Heavy Vehicles Factory को 118 Arjun Mk 1A टैंकों का अनुबंध दिया, डिलीवरी 2024 के लिए निर्धारित है।
- 2021 Oct: फैक्ट्री को AVNL के रूप में corporatised किया गया। मूल indent को अमान्य घोषित किया गया, जिससे एक नया purchase order आवश्यक हुआ।
- 2026 Jul: कोई टैंक डिलीवर नहीं हुए हैं; procurement प्रक्रिया फँसी हुई है।
- Defence Acquisition Procedure, 2020 के तहत indigenous content requirement को 40 % से 50 % तक बढ़ाया गया, जिससे आयातित घटकों की लागत बढ़ी।
- Power‑pack सप्लायर MTU (Germany) ने 11‑वर्ष की देरी के बाद उत्पादन रोक दिया, जिससे टैंकों में एक महत्वपूर्ण सबसिस्टम नहीं बचा।
महत्वपूर्ण तथ्य
मूल CAG रिपोर्ट (2014) ने दिखाया कि Arjun के performance benchmarks रूसी T‑90 से अधिक सेट किए गए थे, फिर भी टैंक ने firepower, mobility और survivability में इसे पीछे छोड़ दिया। DRDO ने upgraded टैंकों को शेड्यूल से 21 दिन पहले डिलीवर किया और दो वर्षों में 15 प्रमुख upgrades और 72 modifications पूरे किए।
ऑपरेशनल आवश्यकता के बावजूद, 124 मौजूदा Arjun Mk 1 टैंकों में SAMHO missile नहीं है, जो 1.5‑km से 5‑km तक की सिद्ध anti‑tank guided missile है और टैंक की मुख्य गन से फायर की जा सकती है। Trials (2020‑2024) ने इसकी विश्वसनीयता की पुष्टि की, और यह वर्तमान बेड़े के लिए लागत‑प्रभावी upgrade प्रदान करेगी।
UPSC प्रासंगिकता
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