समीक्षा
On 19 May 2026, Chief Justice of India Surya Kant ने नई‑संचालित Navi Mumbai International Airport के नामकरण को लेकर विरोधों से संबंधित एक याचिका को संबोधित किया। उन्होंने दोहराया कि शांति पूर्ण और वैध विरोध का अधिकार सुनिश्चित है, लेकिन इसे सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित नहीं करना चाहिए या सामान्य नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन नहीं करना चाहिए।
मुख्य विकास
- CJI के नेतृत्व में तीन‑जजों की बेंच ने युवा विरोधियों के खिलाफ संभावित आपराधिक मामलों से न्यायिक सुरक्षा के अनुरोध को खारिज कर दिया।
- याचिका ने तर्क दिया कि आपराधिक मामलों को दायर करने से शामिल युवाओं का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा।
- बेंच ने स्पष्ट किया कि अदालतें हवाई अड्डे के नामकरण के “नीति‑निर्धारण” निर्णय में हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं; यह कार्यकारी शाखा का क्षेत्र है।
- इन टिप्पणियों ने सुप्रीम कोर्ट के 2018 के “स्वर्ण नियम” को दोहराया कि विरोध के अधिकार को निवासियों के शांति पूर्ण जीवन के अधिकार के साथ संतुलित किया जाना चाहिए।
- पहले के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय (2018, 2020) जंतर मंतर, बोट क्लब, और शहीन बाघ विरोधों पर मूल अधिकारों को सार्वजनिक सुविधा के साथ संतुलित करने की आवश्यकता को उजागर करते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
• याचिका Prakashjhot Samajik Sanstha द्वारा दायर की गई थी, जो विरोधियों का प्रतिनिधित्व करने वाला एक एनजीओ है।
• Bombay High Court ने पहले समान सुरक्षा के अनुरोध को खारिज कर दिया था।
• सुप्रीम कोर्ट के 2020 के निर्णय में Shaheen Bagh विरोध ने कहा कि सार्वजनिक सड़क का अनिश्चितकालिक कब्जा “यात्रियों के लिए असुविधाजनक” था।
• कोर्ट ने विरोध को “यात्री के अधिकार के साथ संतुलित” बताया और पारस्परिक सम्मान पर ज़ोर दिया।