समीक्षा
Delhi High Court की 60वीं वर्षगाँठ के उद्घाटन कार्यक्रम में, Chief Justice of India Surya Kant ने चेतावनी दी कि जहाँ statutes मौन हों, Constitution को न्यायिक निर्णयों का मार्गदर्शन करना चाहिए, विशेष रूप से उभरती प्रौद्योगिकियों पर।
मुख्य विकास
- CJI ने AI द्वारा निर्मित कार्यों को कॉपीराइट सुरक्षा मिलनी चाहिए या नहीं जैसे नए कानूनी प्रश्नों को उजागर किया।
- उन्होंने deepfakes से मुकाबला करने और व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा के लिए एक constitutional दृष्टिकोण अपनाने की अपील की।
- उन्होंने Delhi High Court के अग्रणी कदमों की प्रशंसा की: 2009 में भारत का पहला हाई‑कोर्ट‑संलग्न arbitration centre स्थापित करना, और इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग तथा डिजिटल केस मैनेजमेंट की ओर बदलाव।
- Justice Vikram Nath ने हाई कोर्ट की चार जजों से बढ़कर जटिल सिविल और कॉमर्शियल मामलों को संभालने वाले बड़े बेंच तक की प्रगति की सराहना की।
महत्वपूर्ण तथ्य
• Delhi High Court की स्थापना 1966 में हुई, जो राजधानी के राजनीतिक केंद्र के रूप में उभरने के साथ मेल खाती है।
• यह मूल सिविल अधिकारिता रखता है, जिससे यह बड़े वाणिज्यिक विवादों को सीधे सुन सकता है, बिना निचली अदालतों को रेफ़र किए।
• इसका विशेषीकृत intellectual property division ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत प्रतिष्ठा हासिल की है।
• अदालत की डिजिटल पहलों ने भारतीय न्यायपालिका में व्यापक e‑governance प्रवृत्ति को दर्शाया है।
UPSC प्रासंगिकता
CJI के जोर को समझना aspirants के लिए मददगार है।