April 4, 2026 — M.K. Stalin ने हाल ही में जारी किए गए CBSE पाठ्यक्रम ढाँचे की आलोचना की, जो NEP 2020 के साथ संरेखित है, इसे गैर‑हिंदी बोलने वाले राज्यों में हिंदी थोपने का एक गुप्त प्रयास बताया।
मुख्य विकास
- Stalin का आरोप है कि ढाँचा एक "three-language formula" को छुपा रहा है, जो दक्षिणी राज्यों के छात्रों के लिए हिंदी को अनिवार्य बना देगा।
- वे पारस्परिकता पर सवाल उठाते हैं, यह पूछते हुए कि क्या हिंदी‑प्रधान राज्यों के छात्रों को तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, बांग्ला या मराठी जैसी भाषाएँ सीखनी पड़ेंगी।
- Stalin ने KVS स्कूलों में पर्याप्त तमिल शिक्षकों की नियुक्ति में केंद्र सरकार की विफलता को उजागर किया, इस कदम को पाखंडी कहा।
- वे प्रस्तावित भाषा अनिवार्यता के लिए शिक्षक उपलब्धता, प्रशिक्षण क्षमता, बुनियादी ढाँचा और निधि संबंधी चिंताएँ उठाते हैं।
- CM इस मुद्दे को निष्पक्षता, संघवाद और समान अवसर के रूप में प्रस्तुत करते हुए, उच्च शिक्षा और रोजगार में क्षेत्रीय असमानताओं की चेतावनी देते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
CBSE ढाँचा NEP 2020 के तहत भारत में पाठ्यक्रम को मानकीकृत करने के लिए बनाया गया है। जबकि नीति "Indian languages" को बढ़ावा देती है, वर्तमान मसौदा हिंदी को प्राथमिकता देता दिखता है, बिना हिंदी‑भाषी क्षेत्रों में पारस्परिक भाषा सीखने के स्पष्ट तंत्र के। तमिलनाडु सरकार ने केंद्रीय स्कूलों में योग्य तमिल शिक्षकों की नियुक्ति की बार‑बार मांग की है, लेकिन यह मांग अभी तक पूरी नहीं हुई है।
UPSC प्रासंगिकता
इस विवाद को समझना GS Paper II (Polity) और GS Paper III (Economy & Development) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह निम्नलिखित पहलुओं को छूता है:
- Cooperative federalism और केंद्र‑राज्य संबंध।
- Lan