सारांश
Indian National Congress ने 17 September 2026 को Modi सरकार पर Parliamentary Standing Committee की कार्यवाही का दुरुपयोग करके उच्च‑मूल्य UPI लेन‑देनों पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने के अपने निर्णय का बचाव करने का आरोप लगाया। विपक्ष का कहना है कि यह विशेष प्रस्ताव कभी समिति के सामने नहीं रखा गया, न ही उसे स्वीकृति मिली।
मुख्य विकास
- Congress के नेताओं Jairam Ramesh और Manish Tewari ने सरकार के कदम को “pathetic attempt” कहा, जो सार्वजनिक प्रतिक्रिया से ध्यान हटाने का प्रयास है।
- सरकार ने Finance Committee की पूर्व चर्चा और रिपोर्ट के अपनाए जाने के समय Congress MPs की उपस्थिति का हवाला दिया, लेकिन समिति ने नए MDR प्रस्ताव पर कभी चर्चा नहीं की।
- Congress के उप‑leader Gaurav Gogoi ने जोर दिया कि Department of Finance ने समिति के साथ अपनी बैठक के दौरान कोई विशेष UPI कर प्रस्ताव नहीं रखा था।
- 0.4% का MDR 15 October 2026 से ₹2,000 से ऊपर के UPI लेन‑देनों पर लागू होगा, जिससे छोटे व्यापारियों पर इसके प्रभाव को लेकर चिंताएँ उत्पन्न हुई हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
MDR एक शुल्क है जो प्रत्येक डिजिटल लेन‑देन पर व्यापारियों पर लगाया जाता है, उपभोक्ताओं पर नहीं। सरकार का तर्क है कि यह शुल्क भारतीय भुगतान शुल्कों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप करेगा और विदेशी भुगतान‑ऐप प्रदाताओं की चिंताओं को दूर करेगा। आलोचक कहते हैं कि यह शुल्क छोटे व्यापारियों की लागत बढ़ाएगा, जबकि बड़े विदेशी संस्थान, विशेष रूप से U.S. firms, अपने प्लेटफ़ॉर्म पर लेन‑देन की मात्रा बढ़ने से लाभान्वित हो सकते हैं।
UPSC प्रासंगिकता
इस एपिसोड को समझना aspirants की मदद करता है:
- GS2 (Polity): संसद समितियों की भूमिका और सीमाएँ, कार्यकारी‑विधायी संबंध, और विपक्ष की रणनीतियाँ।
- GS3 (Economy): डिजिटल भुगतान प्रणालियों की संरचना, लेन‑देन शुल्क का माइक्रो‑उद्यमों पर प्रभाव, और उदारीकृत वित्तीय क्षेत्र में नियामक चुनौतियाँ।
- GS4 (Ethi