समीक्षा
28 May 2026 को, CPI(M) ने एक प्रबल बयान जारी किया, जिसमें उसने Supreme Court के उस फैसले की निंदा की, जिसने चुनावी रोल की Special Intensive Revision (SIR) को बरकरार रखा। पार्टी ने इस निर्णय को "न्याय का अपमान" कहा और मताधिकार की रक्षा तथा चुनावी सुधारों की दिशा में एक राष्ट्रीय अभियान की घोषणा की।
मुख्य विकास
- फ़ैसला बरकरार: सर्वोच्च न्यायालय ने SIR प्रक्रिया की वैधता की पुष्टि की, इसे संवैधानिक वैधता प्रदान की।
- Alleged disenfranchisement: CPI(M) का दावा है कि इस प्रक्रिया से कमजोर नागरिकों, विशेषकर गरीब, प्रवासी, अल्पसंख्यक, दलित और आदिवासी वर्गों को बड़े पैमाने पर बहिष्कृत किया गया है।
- Numbers cited: West Bengal में 1 crore से अधिक मतदाताओं को संदेहास्पद चिह्नित किया गया; लगभग 27 lakh मतदाताओं ने न्यायिक राहत के बावजूद अपने मताधिकार खो दिए, ऐसा दावा किया गया।
- Logical discrepancy: पार्टी ने मतदाताओं को चिन्हित करने के लिए "अपरिक्षित सॉफ़्टवेयर" और एल्गोरिदम के उपयोग की आलोचना की, इसे एक तार्किक विसंगति कहा।
- Citizenship verification: अदालत ने Election Commission (EC) को हटाए गए मतदाताओं के नाम नागरिकता जांच के लिए प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, जिसे CPI(M) ने विवादास्पद National Register of Citizens (NRC) के समान बताया।
- Political response: CPI(M) ने अपने केंद्रीय समिति बैठक में एक राष्ट्रीय अभियान शुरू करने का निर्णय लिया, समान विचारधारा वाली पार्टियों के साथ गठबंधन करके मतदान अधिकार की रक्षा करने का लक्ष्य रखा।
महत्वपूर्ण तथ्य
SIR अभ्यास का उद्देश्य इलेक्टोरल रोल से डुप्लिकेट, नकली या अयोग्य प्रविष्टियों को हटाना है। आलोचक तर्क देते हैं कि मानदंड—जो अक्सर दस्तावेज़ी प्रमाण पर आधारित होते हैं—उन वर्गों को नुकसान पहुँचाते हैं जिनके पास औपचारिक कागजात नहीं होते। West Bengal में, पार्टी का आरोप है कि एल्गोरिदम ने एक crore से अधिक मतदाताओं को "संदेहास्पद" चिह्नित किया और उनमें से 27 lakh को अंततः रोल से हटा दिया गया।
Supreme Court ने SIR को बरकरार रखते हुए कहा कि नागरिकता निर्धारित करना t का क्षेत्र है।