केन्द्रीय सरकार की CSS for Judicial Infrastructure & Digital Courts: फंडिंग, प्रगति और UPSC प्रभाव
Law and Justice मंत्रालय ने बताया कि न्यायिक बुनियादी ढाँचा के लिए केंद्र‑प्रायोजित योजना, Digital Courts, eCourts और CIS 4.0 जैसी डिजिटल पहलों के साथ मिलकर, भारत भर में कोर्ट सुविधाओं को उन्नत किया गया है और लाखों रिकॉर्ड को डिजिटल किया गया है। 22,712 कोर्ट हॉल के संचालन और प्रति मिलियन 22 न्यायाधीशों के अनुपात के साथ, यह कार्यक्रम केंद्र‑राज्य सहयोग, वित्तीय नवाचार (SNA‑SPARSH) और ई‑गवर्नेंस को उजागर करता है—जो UPSC अभ्यर्थियों के लिए मुख्य विषय हैं।
अवलोकन The Centrally Sponsored Scheme (CSS) के तहत जिला और अधीनस्थ न्यायालयों में बुनियादी ढाँचा विकास 1993‑94 से कार्यान्वित है। यह योजना कोर्ट हॉल, न्यायाधीशों के लिए आवासीय इकाइयाँ, वकीलों के हॉल, शौचालय परिसर और डिजिटल कंप्यूटर कक्षों को वित्त पोषित करती है। भौतिक उन्नयन के साथ-साथ, डिजिटल पहलों का एक समूह – जिसे सामूहिक रूप से Digital Courts कहा जाता है – केस प्रबंधन को आधुनिक बनाने के लिए लागू किया जा रहा है। मुख्य विकास वित्तीय सहायता केंद्र‑राज्य लागत‑साझाकरण पैटर्न में प्रदान की जाती है; पिछले पाँच वर्षों के लिए निधियों की मात्रा Annexure‑I में विस्तृत है। 28‑Feb‑2026 तक, स्वीकृत शक्ति 25,894 judges में से 21,027 कार्यरत हैं और 22,712 court halls मौजूद हैं, जिससे लगभग 22 प्रति मिलियन का judge‑to‑population ratio बनता है। eCourts Project ने 1.07 करोड़ e‑filings दर्ज किए हैं, Rs 1,404 crore मूल्य के कोर्ट‑फी लेन‑देनों को प्रोसेस किया है और 660.36 crore पृष्ठों के रिकॉर्ड को डिजिटल किया है। National Judicial Data Grid (NJDG) के तहत, 35.17 करोड़ से अधिक आदेश खोज योग्य हैं। Case Information System (CIS) Version 4.0 सभी न्यायालयों में कार्यरत है, जबकि Nyaya Vikas portal भौतिक और वित्तीय प्रगति को रिकॉर्ड करता है। वीडियो‑कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाएँ 3,240 कोर्ट कॉम्प्लेक्स और 1,272 जेलों में स्थापित की गई हैं, जिससे दूरस्थ सुनवाई संभव हुई है। फंड‑रिलीज़ में देरी को दूर करने के लिए SNA‑SPARSH प्रणाली प्रस्तुत की गई है। Important Facts & S
Quick Reference
Key Insight
डिजिटल कोर्ट्स और CSS न्यायिक बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करते हैं, UPSC अभ्यर्थियों के लिए न्याय तक पहुँच को बेहतर बनाते हैं
Key Facts
- न्यायिक बुनियादी ढाँचे के लिए Centrally Sponsored Scheme (CSS) 1993‑94 से संचालित है, जो कोर्ट हॉल, न्यायाधीश आवास, वकील हॉल, शौचालय और डिजिटल कंप्यूटर कक्षों को वित्तपोषित करता है।
- 28 फ़रवरी 2026 तक, स्वीकृत 25,894 में से 21,027 न्यायाधीश पदस्थ हैं, और 22,712 कोर्ट हॉल कार्यरत हैं, जिससे प्रति मिलियन जनसंख्या पर औसत 22 न्यायाधीश होते हैं।
- eCourts प्रोजेक्ट ने 1.07 करोड़ e‑filings दर्ज कीं, Rs 1,404 करोड़ कोर्ट‑फ़ी लेनदेन प्रोसेस किए और 660.36 करोड़ पृष्ठों के रिकॉर्ड को डिजिटल किया।
- National Judicial Data Grid (NJDG) अब 35.17 करोड़ से अधिक खोज योग्य आदेशों की मेजबानी करता है; CIS 4.0 सभी कोर्टों में लाइव है।
- वीडियो‑कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाएँ 3,240 कोर्ट कॉम्प्लेक्स और 1,272 जेलों में स्थापित की गई हैं, जिससे दूरस्थ सुनवाई संभव हुई है।
- CSS फ्रेमवर्क के तहत फंड रिलीज़ में देरी को रोकने के लिए SNA‑SPARSH तंत्र पेश किया गया है।
Background
CSS केंद्र‑राज्य वित्तीय साझेदारी को दर्शाता है जो निचली न्यायपालिका को सुदृढ़ करने के लिए है, जो शीघ्र न्याय (धारा 21) के संवैधानिक अधिकार का एक प्रमुख स्तम्भ है। Digital Courts, e‑filings और CIS 4.0 ई‑गवर्नेंस को प्रतिबिंबित करते हैं, जिसका लक्ष्य मामलों की लंबी अवधि को कम करना और पारदर्शिता में सुधार करना है—जो GS‑2 (Polity) और GS‑3 (Judiciary) के मुख्य मुद्दे हैं।
UPSC Syllabus
- Essay — Economy, Development and Inequality
Mains Angle
GS‑2: CSS‑प्रेरित बुनियादी ढाँचा उन्नयन और Digital Courts के न्यायिक दक्षता और न्याय तक पहुँच पर प्रभाव का मूल्यांकन करें, और शेष अंतर को पाटने के लिए नीति उपाय सुझाएँ।