समीक्षा
भारत में साल्मोनेला द्वारा उत्पन्न संक्रमणों का बोझ बढ़ रहा है। रोग का स्पेक्ट्रम हल्की गैस्ट्रोएंटेराइटिस से लेकर जीवन‑धमकी देने वाली रक्तधारा संक्रमण तक है। एक हालिया Lancet अध्ययन ने 2023 में 4.9 million टायफाइड मामलों और 7,850 मौतों का अनुमान लगाया, साथ ही 730,000 अस्पताल भर्ती। इन अधिकांश अस्पतालियों में फ्लुओरोक्विनोलोन‑प्रतिरोधी स्ट्रेन्स शामिल थे।
मुख्य विकास
- 2015‑19 में S. Typhi में फ्लुओरोक्विनोलोन प्रतिरोध 85 % तक बढ़ा और अभी भी उच्च बना हुआ है।
- थाने में (अप्रैल‑जुलाई 2025) प्रकोप ने टैंकर‑वॉटर सप्लाई से जुड़ी 26.35 % सेफ्ट्रियाक्सोन प्रतिरोध दिखायी।
- blaNDM‑5 जीन वाले कार्बापेनेम‑प्रतिरोधी S. Typhi का दस्तावेज़ीकरण किया गया है।
- WHO बच्चों के लिए टायफाइड कॉन्जुगेट वैक्सीन की सिफारिश करता है, लेकिन यह अभी तक भारत के सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल नहीं है।
महत्वपूर्ण तथ्य
संक्रमण मार्ग: टायफाइड मानव वाहकों से मल-ओरल मार्ग से फैलता है; गैर‑टायफाइडल स्ट्रेन्स का व्यापक इकोलॉजी है जिसमें पोल्ट्री, अंडे, मांस और पर्यावरण शामिल हैं। प्रदूषण फार्म, कसाईखानों, परिवहन, रेस्तरां और घर की रसोई में हो सकता है – यह एक क्लासिक One Health समस्या है।
संवेदनशील समूह: छोटे बच्चे, बुजुर्ग और इम्यूनो‑कम्प्रोमाइज़्ड व्यक्ति आक्रामक रोग के उच्च जोखिम में होते हैं।
निदान: Blood culture संदेहित टायफाइड के लिए स्वर्ण मानक है और एंटीबायोटिक शुरू करने से पहले किया जाना चाहिए। अकेले Widal टेस्ट विश्वसनीय नहीं है।
उपचार: साधारण गैर‑टायफाइडल गैस्ट्रोएंटेराइटिस के लिए केवल तरल और इलेक्ट्रोलाइट प्रतिस्थापन आवश्यक है। एंटीबायोटिक गंभीर या आक्रामक मामलों और जोखिम कारकों वाले रोगियों के लिए आरक्षित होते हैं। एंटीबायोटिक का अधिक उपयोग AMR को बढ़ावा देता है।