अवलोकन
एक हालिया Indian Express जांच (23 सितंबर 2026) ने Election Commission of India (EC) के तीन‑सदस्यीय निकाय के भीतर एक गंभीर असहमति उजागर की। दो कमिश्नरों, Sukhbir Singh Sandhu और Vivek Joshi ने Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar के खिलाफ एकतरफा नियम परिवर्तन, मतदाता सूची में संशोधन और केंद्रीकृत डेटा एक्सेस को लेकर 14 आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट ने यह भी बताया कि Goa के 97 पात्र मतदाताओं को चुनावी सूची से हटा दिया गया क्योंकि केंद्रीकृत ECINet सिस्टम ने जमीन‑स्तर के अधिकारियों को त्रुटि सुधारने से रोका।
मुख्य विकास
- दो EC सदस्यों द्वारा 10‑महीने की अवधि (सितंबर 2025‑2026) में 14 आपत्तियां उठाई गईं।
- नियमों में एकतरफा संशोधनों, मतदाता जोड़/हटाने, और डेटा एक्सेस के आरोप लगाए गए हैं, बिना पूरी कमिशन की मंजूरी के।
- 97 Goa मतदाताओं को सूची से बाहर किया गया; ECINet सॉफ़्टवेयर ने उलटने से रोका।
- राज्य योजनाएँ जैसे Goa Mediclaim Scheme, जो चुनावी सूची पर निर्भर हैं, प्रभावित हुईं।
- कानूनी बहस जारी है कि ‘मतदान का अधिकार’ वैधानिक है या मौलिक अधिकार।
महत्वपूर्ण तथ्य
संविधान के Article 326 में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (UAS) प्रदान किया गया है। प्रारम्भ में मतदान आयु 21 वर्ष थी; 61st Amendment (1989) ने इसे 18 कर दिया। चुनावी सूची Representation of the People Act, 1950 और Representation of the People Act, 1951 द्वारा नियंत्रित है। 1950 अधिनियम की धारा 21 EC को सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने का अधिकार देती है। 2023 Appointment Act में सर्वसम्मति निर्णय अनिवार्य किया गया है; अन्यथा बहुमत निर्णय लेता है।
Supreme Court के निर्णय मतदान अधिकार की कानूनी स्थिति को आकार देते हैं। Kuldip Nayar v. Union of India (2006) में पाँच‑जज बेंच ने कहा कि चुनाव का अधिकार RPA 1951 की धारा 62 के तहत वैधानिक अधिकार है।