Overview
जोखिम विश्लेषक Safi Ahsan Rizvi, पूर्व सलाहकार to the National Disaster Management Authority (NDMA) and retired Indian Police Service (IPS) officer, चेतावनी देते हैं कि हिमालय को बढ़ते ग्लेशियल आउटबर्स्ट जोखिमों से निपटने के लिए वास्तविक‑समय, सीमा‑पार डेटा‑शेयरिंग प्लेटफ़ॉर्म की आवश्यकता है। वे कहते हैं कि सहयोग को एक सार्वजनिक वस्तु के रूप में माना जाना चाहिए, न कि कूटनीतिक अनुग्रह के रूप में।
Key Developments
- नेपाल में हालिया बाढ़ एक रॉक‑आइस एवलांच द्वारा उत्पन्न हुई, जिसने 2023 के साउथ ल्होनाक घटना की तुलना में बहुत अधिक गति से पानी जारी किया।
- जलवायु परिवर्तन ग्लेशियर पिघलने की गति को तेज़ कर रहा है, उच्च‑जोखिम वाले ग्लेशियल झीलों का विस्तार कर रहा है और हिमालय में अत्यधिक वर्षा को बढ़ा रहा है।
- भारत ने निगरानी और शमन के लिए 195 उच्च‑जोखिम वाले ग्लेशियल झीलों की पहचान की है।
- प्रारंभिक चेतावनी तकनीकें जैसे satellite interferometry और ग्राउंड सेंसर उपलब्ध हैं, लेकिन उनका पर्याप्त उपयोग नहीं हो रहा है।
Important Facts
नेपाल आपदा में एक विशाल भू‑स्खलन शामिल था, जिसने संभवतः अस्थायी रूप से नदी को बांध दिया, जिससे एक अल्पकालिक झील बन गई जो नीचे की ओर फट गई। सटीक जल मात्रा अभी अध्ययनाधीन है, लेकिन सैटेलाइट छवियां दिखाती हैं कि एवलांच लगभग एक किलोमीटर ऊर्ध्वाधर गिरा, जिससे बाढ़ को असाधारण गतिज ऊर्जा मिली। पारंपरिक ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) तंत्र अलग होते हैं क्योंकि मुख्य ट्रिगर रॉक‑आइस ढहना था, न कि मोराइन‑डैम का टूटना।
उच्च‑जोखिम वाले झीलों के लिए शमन विकल्पों में syphoning, पंपिंग, या सुरक्षित जल निकासी चैनल बनाना शामिल है। ये विधियां तकनीकी रूप से संभव हैं लेकिन ऊँचाई (≈5,000 m) और सीमित कार्यकाल के कारण चुनौतीपूर्ण हैं।
Exam Relevance
हिमालयीय ग्लेशियल जोखिमों की समझ कई से जुड़ी है