सबरिमाला संदर्भ – मुख्य मुद्दे
पर 21 April 2026, the Supreme Court ने सबरिमाला संदर्भ के छठे दिन की सुनवाई की। बेंच, जिसमें नौ न्यायाधीश शामिल थे, यह जांचा कि क्या संविधान तब हस्तक्षेप कर सकता है जब किसी विश्वासी को केवल उसकी जन्म‑आधारित पहचान के कारण देवता को स्पर्श करने से रोका जाता है।
मुख्य विकास (बुलेट पॉइंट्स)
- न्यायाधीश Amanullah ने पूछा कि क्या केवल जन्म के आधार पर बहिष्कार होने पर संवैधानिक उल्लंघन होता है।
- वरिष्ठ वकील V Giri ने तर्क दिया कि Article 25 के तहत अधिकार को देवता की विशेषताओं के अनुरूप होना चाहिए, अर्थात् Lord Ayyappa की ब्रह्मचर्य प्रकृति के साथ।
- न्यायाधीश BV Nagarathna ने दोहराया कि एक विश्वासी किसी प्रथा की तर्कसंगतता पर प्रश्न नहीं उठा सकता; यह विश्वास का मामला है।
- न्यायाधीश Varale ने उजागर किया कि आधुनिक विश्वासी, नई दार्शनिकताओं के संपर्क में होने के बावजूद, अभी भी प्राचीन रीति‑रिवाजों से बंधे हो सकते हैं।
- न्यायाधीश Bagchi ने जांचा कि क्या किसी संप्रदाय के सदस्य अपने ही प्रथाओं को अदालत में चुनौती दे सकते हैं।
- न्यायाधीश Sundresh ने सुझाव दिया कि social reform clause जन्म‑आधारित भेदभाव को दूर कर सकता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
2018 का निर्णय जिसने Sabarimala Temple को महिलाओं के लिए खोल दिया था।
