<p>सुप्रीम कोर्ट ने 10 अप्रैल 2026 को एक याचिका को खारिज किया, जिसमें संघ सरकार को आगामी <span class="key-term" data-definition="caste census — a demographic exercise that records population by caste categories, intended to inform social welfare and resource allocation (GS3: Society/Demography)">caste census</span> को रोकने का निर्देश देने की मांग की गई थी। याचिका ने संसाधन पुनर्वितरण को "जनसंख्या जिम्मेदारी" से जोड़ने और एकल‑संतान वाले परिवारों के लिए आर्थिक प्रोत्साहन बनाने की भी मांग की थी।</p>
<h3>मुख्य विकास</h3>
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<li>मुख्य न्यायाधीश Surya Kant के नेतृत्व में तीन‑न्यायाधीशों की बेंच, साथ ही न्यायाधीश Joymalya Bagchi और Vipul Pancholi ने याचिकाकर्ता द्वारा व्यक्तिगत रूप से दायर की गई याचिका को सुनने से इनकार कर दिया।</li>
<li>कोर्ट ने याचिका में प्रयुक्त भाषा के प्रति तीव्र असंतोष व्यक्त किया, इसे "badtameezi" (असभ्य) के रूप में लेबल किया और इसकी शिष्टाचार पर प्रश्न उठाए।</li>
<li>चेतावनी के बाद, बेंच ने बिना किसी अतिरिक्त आदेश के याचिका को औपचारिक रूप से खारिज कर दिया।</li>
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<h3>महत्वपूर्ण तथ्य</h3>
<p>याचिका एक व्यक्तिगत कार्यकर्ता द्वारा दायर की गई थी, जिसने बिना कानूनी सलाहकार के उपस्थित हुआ। जनगणना को रोकने के लिए कोई विशिष्ट कानूनी प्रावधान नहीं बताया गया, और कोर्ट ने इस अनुरोध को प्रक्रियात्मक और सामग्री दोनों दृष्टि से अस्थिर पाया। बेंच के टिप्पणी ने न्यायिक दायरों में शिष्टाचार की अपेक्षा को उजागर किया, जो संविधान में संस्थानों के प्रति सम्मान के महत्व पर आधारित सिद्धांत है।</p>
<h3>UPSC प्रासंगिकता</h3>
<p>इस निर्णय को समझना कई कारणों से महत्वपूर्ण है:</p>
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<li><strong>न्यायिक समीक्षा और संवैधानिक सर्वोच्चता</strong>: यह मामला सुप्रीम कोर्ट की कार्यकारी कार्यों को चुनौती देने वाली याचिकाओं का निपटारा करने की भूमिका को पुनः स्थापित करता है, जो GS2 (राजनीति) का मुख्य विषय है।</li>
<li><strong>जनसांख्यिकीय डेटा और नीति नियोजन</strong>: जाति जनगणना सकारात्मक कार्रवाई, संसाधन वितरण और निर्वाचन सीमांकन के लिए सूक्ष्म डेटा प्रदान करेगी, जो सीधे GS3 (अर्थव्यवस्था) और GS4 (समाज) से जुड़ी है।</li>
<li><strong>प्रक्रियात्मक कानून और याचिका मसौदा तैयार करना</strong>: याचिका की भाषा पर कोर्ट की आलोचना उचित कानूनी मसौदा तैयार करने के महत्व को रेखांकित करती है, जो UPSC परीक्षा के निबंध और साक्षात्कार चरणों के लिए प्रासंगिक कौशल है।</li>
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