समीक्षा
अगस्त 2026 में, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने Chief Justice of India (CJI) सूर्य कांत को तीन पत्र लिखे। ये पत्र राजस्थान हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के आचरण के बारे में गंभीर चिंताएँ उठाते हैं। मेहता ने पक्षपात, भाईभतीजावाद और प्रशासनिक दुरुपयोग का आरोप लगाया है जो न्यायपालिका की स्वतंत्रता को खतरे में डालता है।
मुख्य विकास (अगस्त 2026)
- 2 अगस्त: मेहता ने राजस्थान हाई कोर्ट में एक "भयानक और परेशान करने वाला परिदृश्य" बताया, जिसमें उन्होंने शर्मा की नेतृत्व की कमी और कई अनुशासनहीनता के मामलों का उल्लेख किया।
- 10 अगस्त: मेहता ने रिपोर्ट किया कि मामलों को बिना कारण के शर्मा की बेंच पर मनमाने ढंग से स्थानांतरित किया गया, और CJI के लिखित विवरण देने के वादे को वापस ले लिया गया।
- 17 अगस्त: मेहता ने इस स्थिति को "व्यापक भाईभतीजावाद और पक्षपात" कहा और सवाल उठाया कि मार्च 2023 में उनका पुनःस्थापना अनुरोध अस्वीकृत होने के बाद भी शर्मा एसीजे के रूप में क्यों जारी हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
- शर्मा 26 सितंबर 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले हैं, जिन्होंने एसीजे के रूप में दस महीने से अधिक कार्य किया है।
- वे मूल रूप से पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के जज थे और 26 मई 2025 को राजस्थान में पुनःस्थापना के लिए अनुशंसित किए गए थे।
- मेहता ने बार-बार CJI से किसी अन्य राज्य के नियमित चीफ जस्टिस को नियुक्त करने का अनुरोध किया है, लेकिन यह अनुरोध अभी तक अनुत्तरित है।
- आरोपों में शामिल हैं: अचानक मामलों की वापसी, न्यायिक अधिकारियों की अपमानजनक व्यवहार, एक बैठक जिसमें कुछ वकीलों को प्राथमिकता दी गई, और बहु‑मंजिला अतिथि गृह के लिए महँगा योजना।
UPSC प्रासंगिकता
ये पत्र UPSC पाठ्यक्रम में आने वाले कई विषयों को उजागर करते हैं:
- न्यायिक स्वतंत्रता और उसे संरक्षित करने वाले तंत्र।
- जजों के स्थानांतरण और नियुक्तियों में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की भूमिका।
- मुद्दे