Delhi High Court ने 16 सितंबर 2026 को Union Government से यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या वह सामाजिक‑मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर लत लगने वाले डिज़ाइन तत्वों को रोकने के लिए नीति बनाने की योजना बना रहा है।
मुख्य विकास
- Justice Nitin Wasudeo Sambre और Justice Amit Sharma से मिलकर बनी बेंच तीन हफ़्ते बाद एक PIL सुनेगी।
- अदालत ने Additional Solicitor General Chetan Sharma को इस मामले पर निर्देश लेने के लिए निर्देशित किया।
- याचिकाकर्ता Prof. Vikas Kathuria एक विशेषज्ञ समिति के गठन की मांग करता है जो addictive architecture जैसे infinite scroll और autoplay की जांच करे।
- केंद्र और कई प्लेटफ़ॉर्म ने तर्क दिया कि समान याचिकाएँ उच्च न्यायालयों द्वारा खारिज कर दी गई हैं, जिससे मामले की स्थिरता पर सवाल उठते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
याचिका यह उजागर करती है कि 18‑24 वर्ष के भारतीय युवा प्रतिदिन औसतन 120 मिनट सामाजिक मीडिया पर बिताते हैं। क्लिनिकल अध्ययन लंबे समय तक उपयोग को आत्महत्या और अवसाद के बढ़ते जोखिमों से जोड़ते हैं। यह याचिका National Commission for Protection of Child Rights और केंद्रीय सरकार से इन डिज़ाइन विशेषताओं को प्रतिबंधित, रोकने या नियमन करने का आग्रह करती है।
UPSC प्रासंगिकता
यह मामला technology governance, public health, और child rights के संगम पर स्थित है। अभ्यर्थियों को ध्यान देना चाहिए:
- कैसे अदालतें उभरते डिजिटल मुद्दों पर नीति को प्रभावित कर सकती हैं (GS2: Polity)।
- Statutory bodies जैसे National Commission for Protection of Child Rights की भूमिका।