सारांश
DNPA ने DPDP Act और उसके नियमों को चुनौती देने के लिए याचिका दायर की है। याचिका का तर्क है कि पत्रकारिता गतिविधि के लिए विशिष्ट अपवाद की अनुपस्थिति मीडिया जांच और नियमित समाचार संग्रह पर ठंडा प्रभाव डाल सकती है।
मुख्य विकास
- याचिका इस बात को उजागर करती है कि पत्रकारों को डेटा फिड्यूशियरी माना जा सकता है, जिससे उन्हें जिन व्यक्तियों की वे जांच कर रहे हैं, उनकी सहमति प्राप्त करनी पड़ेगी।
- DPDP Act का अनुपालन न करने पर ₹250 करोड़ तक का दंड लगाया जा सकता है, जो छोटे समाचार कक्षों के लिए खतरा बनता है।
- याचिका Section 44(3) को भी चुनौती देती है, जिसने RTI Act के तहत व्यक्तिगत डेटा के खुलासे के लिए सार्वजनिक‑हित योग्यता को हटा दिया।
- Supreme Court ने नोटिस जारी किया है, जो प्रेस स्वतंत्रता और गोपनीयता के बीच संतुलन की मांग करता है।
- Union Minister Ashwini Vaishnaw ने संपादकों से मिलकर सहमति बनाने की इच्छा जताई है।
महत्वपूर्ण तथ्य
DPDP Act के 2018, 2019 और 2021 के प्रारंभिक मसौदे में पत्रकारिता अपवाद शामिल था, जिसे अंतिम संस्करण में हटा दिया गया। इस अधिनियम में अनुसंधान और सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए अपवाद प्रदान किए गए हैं, जिससे पत्रकारों को समान सुरक्षा न देना उचित ठहराना कठिन हो जाता है। ₹250 करोड़ तक का दंड प्रावधान एक स्थिर राशि है, जो आउटलेट के आकार के अनुपात में नहीं है।
2026 के Reuters Institute रिपोर्ट से पता चलता है कि 18‑ से 24‑ वर्ष के युवाओं में सामाजिक मीडिया को प्राथमिक समाचार स्रोत के रूप में बताने का प्रतिशत 2015 में 21 % से बढ़कर 2025 में 39 % हो गया, जो पारंपरिक प्रिंट से दूर होने का संकेत देता है।
UPSC प्रासंगिकता
पत्रकारिता और गोपनीयता के बीच तनाव को समझना
