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पूर्व EC आशोक लवासा ने विशेष गहन पुनरावृत्... | UPSC Current Affairs

पूर्व EC आशोक लवासा ने विशेष गहन पुनरावृत्ति (Special Intensive Revision) के तहत इलेक्टोरल रोल की आलोचना की — लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए निहितार्थ

पूर्व चुनाव आयुक्त आशोक लवासा ने 3 सितंबर 2026 को कहा कि चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरावृत्ति (Special Intensive Revision) इलेक्टोरल रोल की अनुचित है और यह मतदाता विश्वास के लिए खतरा है। उन्होंने 13 करोड़ नामों के हटाए जाने, बढ़ती मतदाता उदासीनता, और व्यापक शासन मुद्दों जैसे राजनीतिक दलों की RTI स्थिति और इलेक्टोरल बॉन्…
Overview पर 3 September 2026 , former Election Commissioner Ashok Lavasa ने Prof. Jagdeep Singh Chhokar Memorial Lecture को Association for Democratic Reforms द्वारा आयोजित किया। उन्होंने चेतावनी दी कि चल रही special intensive revision of electoral rolls वैधानिक निकायों में “शक्ति ही अधिकार” की सोच को दर्शाती है। Key Developments Lavasa ने पुनरावृत्ति प्रक्रिया को “अन्यायपूर्ण” कहा और बताया कि Election Commission of India ने ऐसी प्रक्रिया लागू की है जो लाखों लोगों को प्रभावित करती है। उन्होंने बताया कि न्यायपालिका ने प्रक्रिया को बरकरार रखा है, जबकि निष्पक्षता को लेकर चिंताएँ थीं। लगभग 13 करोड़ नाम रोल से हटाए जा चुके हैं, जिससे कानून की भावना पर प्रश्न उठते हैं। Lavasa ने चेतावनी दी कि ऐसे कदम मतदाता उदासीनता को और गहरा सकते हैं, यह बताते हुए कि 33 % योग्य नागरिक पहले ही मतदान से दूर हैं। उन्होंने इस मुद्दे को व्यापक शासन चुनौतियों से जोड़ा, जैसे कि Central Information Commission का यह निर्णय कि राजनीतिक दल RTI Act के अंतर्गत आते हैं, और electoral bonds का निरंतर उपयोग। Important Facts पुनरावृत्ति का उद्देश्य रोल से डुप्लिकेट, मृत या अयोग्य प्रविष्टियों को हटाना है। हालांकि, आलोचक तर्क देते हैं कि कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की कमी है और हटाए गए नामों की मात्रा—13 करोड़ नाम—वैध मतदाताओं को बहिष्कृत कर सकती है। व्याख्यान ने यह भी उजागर किया कि राजनीतिक दलों ने अधिकांशतः ... को नजरअंदाज किया है।
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Quick Reference

Key Insight

EC की विशाल मतदाता‑रोल सफ़ाई भारत के लिए संवैधानिक और लोकतांत्रिक चिंताएँ उठाती है।

Key Facts

  1. इलेक्टोरल रोल की Special Intensive Revision (SIR) की घोषणा 3 September 2026 को की गई थी।
  2. SIR के तहत रोल से लगभग 13 crore (130 million) नाम हटाए जा चुके हैं।
  3. पूर्व EC आशोक Lavasa ने प्रक्रिया को “अन्यायपूर्ण” कहा, जबकि न्यायपालिका ने इसे बरकरार रखा।
  4. 33 % योग्य नागरिक पहले ही मतदान से दूर हैं, यह आंकड़ा SIR के कारण बढ़ सकता है।
  5. Election Commission of India (EC) संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत एक संवैधानिक, स्वतंत्र वैधानिक निकाय है।
  6. Central Information Commission (CIC) ने निर्देश दिया है कि राजनीतिक दल RTI Act के अंतर्गत आएँ, जिससे पारदर्शिता मुद्दे SIR से जुड़े हैं।

Background

SIR का उद्देश्य डुप्लिकेट, मृत या अयोग्य प्रविष्टियों को हटाना है, लेकिन आलोचक कहते हैं कि कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की कमी है, जिससे बहिष्करण का जोखिम है। यह मुद्दा GS‑2 (वैधानिक निकायों की भूमिका और स्वायत्तता) और GS‑4 (नैतिक शासन, पारदर्शिता, और सूचना का अधिकार) से जुड़ा है।

UPSC Syllabus

  • GS4 — Information sharing, transparency, RTI, codes of ethics and conduct
  • Prelims_GS — Public Policy and Rights Issues
  • GS2 — Representation of People's Act
  • GS2 — Governance, transparency, accountability and e-governance
  • Essay — Philosophy, Ethics and Human Values

Mains Angle

GS‑2 में, उम्मीदवार चर्चा कर सकते हैं कि EC की SIR कैसे कानूनी औपचारिकता और कानून की भावना के बीच तनाव को दर्शाती है, और मतदाता अधिकारों की सुरक्षा के लिए सुधार सुझा सकते हैं।

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  5. पूर्व EC आशोक लवासा ने विशेष गहन पुनरावृत्ति (Special Intensive Revision) के तहत इलेक्टोरल रोल की आलोचना की — लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए निहितार्थ
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Overview

Full Article

Overview

पर 3 September 2026, former Election Commissioner Ashok Lavasa ने Prof. Jagdeep Singh Chhokar Memorial Lecture को Association for Democratic Reforms द्वारा आयोजित किया। उन्होंने चेतावनी दी कि चल रही special intensive revision of electoral rolls वैधानिक निकायों में “शक्ति ही अधिकार” की सोच को दर्शाती है।

Key Developments

  • Lavasa ने पुनरावृत्ति प्रक्रिया को “अन्यायपूर्ण” कहा और बताया कि Election Commission of India ने ऐसी प्रक्रिया लागू की है जो लाखों लोगों को प्रभावित करती है।
  • उन्होंने बताया कि न्यायपालिका ने प्रक्रिया को बरकरार रखा है, जबकि निष्पक्षता को लेकर चिंताएँ थीं।
  • लगभग 13 करोड़ नाम रोल से हटाए जा चुके हैं, जिससे कानून की भावना पर प्रश्न उठते हैं।
  • Lavasa ने चेतावनी दी कि ऐसे कदम मतदाता उदासीनता को और गहरा सकते हैं, यह बताते हुए कि 33 % योग्य नागरिक पहले ही मतदान से दूर हैं।
  • उन्होंने इस मुद्दे को व्यापक शासन चुनौतियों से जोड़ा, जैसे कि Central Information Commission का यह निर्णय कि राजनीतिक दल RTI Act के अंतर्गत आते हैं, और electoral bonds का निरंतर उपयोग।

Important Facts

पुनरावृत्ति का उद्देश्य रोल से डुप्लिकेट, मृत या अयोग्य प्रविष्टियों को हटाना है। हालांकि, आलोचक तर्क देते हैं कि कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की कमी है और हटाए गए नामों की मात्रा—13 करोड़ नाम—वैध मतदाताओं को बहिष्कृत कर सकती है। व्याख्यान ने यह भी उजागर किया कि राजनीतिक दलों ने अधिकांशतः ... को नजरअंदाज किया है।

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EC की विशाल मतदाता‑रोल सफ़ाई भारत के लिए संवैधानिक और लोकतांत्रिक चिंताएँ उठाती है।

Key Facts

  1. इलेक्टोरल रोल की Special Intensive Revision (SIR) की घोषणा 3 September 2026 को की गई थी।
  2. SIR के तहत रोल से लगभग 13 crore (130 million) नाम हटाए जा चुके हैं।
  3. पूर्व EC आशोक Lavasa ने प्रक्रिया को “अन्यायपूर्ण” कहा, जबकि न्यायपालिका ने इसे बरकरार रखा।
  4. 33 % योग्य नागरिक पहले ही मतदान से दूर हैं, यह आंकड़ा SIR के कारण बढ़ सकता है।
  5. Election Commission of India (EC) संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत एक संवैधानिक, स्वतंत्र वैधानिक निकाय है।
  6. Central Information Commission (CIC) ने निर्देश दिया है कि राजनीतिक दल RTI Act के अंतर्गत आएँ, जिससे पारदर्शिता मुद्दे SIR से जुड़े हैं।

Background & Context

SIR का उद्देश्य डुप्लिकेट, मृत या अयोग्य प्रविष्टियों को हटाना है, लेकिन आलोचक कहते हैं कि कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की कमी है, जिससे बहिष्करण का जोखिम है। यह मुद्दा GS‑2 (वैधानिक निकायों की भूमिका और स्वायत्तता) और GS‑4 (नैतिक शासन, पारदर्शिता, और सूचना का अधिकार) से जुड़ा है।

UPSC Syllabus Connections

GS4•Information sharing, transparency, RTI, codes of ethics and conductPrelims_GS•Public Policy and Rights IssuesGS2•Representation of People's ActGS2•Governance, transparency, accountability and e-governanceEssay•Philosophy, Ethics and Human Values

Mains Answer Angle

GS‑2 में, उम्मीदवार चर्चा कर सकते हैं कि EC की SIR कैसे कानूनी औपचारिकता और कानून की भावना के बीच तनाव को दर्शाती है, और मतदाता अधिकारों की सुरक्षा के लिए सुधार सुझा सकते हैं।

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