अवलोकन
FAIMA ने सुप्रीम कोर्ट में यह आरोप लगाया है कि NTA ने NEET‑UG 2026 परीक्षा आयोजित करने में "प्रणालीगत विफलता" की है। याचिका न्यायिक निगरानी में एक नई परीक्षा और परीक्षण एजेंसी की संरचनात्मक सुधार की मांग करती है।
मुख्य विकास
- FAIMA ने वकील Tanvi Dubey के माध्यम से NTA को बदलने या बड़े पैमाने पर पुनर्संरचना की मांग करते हुए याचिका दायर की।
- याचिका एक उच्च‑स्तरीय मॉनिटरिंग कमेटी की मांग करती है, जिसका अध्यक्ष एक सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश होगा, जिसमें एक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और एक फोरेंसिक वैज्ञानिक शामिल होंगे, जो परीक्षा के पुनः संचालन की देखरेख करेंगे।
- यह कोर्ट से अनुरोध करती है कि वह यूनियन सरकार को NTA को एक "अधिक मजबूत, प्रौद्योगिकीय रूप से उन्नत, और स्वायत्त" निकाय से बदलने का निर्देश दे।
- याचिका CBI से भी अनुरोध करती है कि वह अनुमानित पेपर लीक पर चार हफ्तों के भीतर स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करे।
- अतिरिक्त मांगों में प्रश्नपत्रों का डिजिटल लॉकिंग और CBT मॉडल की ओर बदलाव शामिल है, जिससे चेन‑ऑफ़‑कस्टडी जोखिम समाप्त हो सकें।
- याचिका केंद्र‑वार परिणामों के प्रकाशन की मांग करती है ताकि किसी भी विसंगति का पता लगाया जा सके।
महत्वपूर्ण तथ्य
3 May 2026 को, NTA ने पेपर लीक के आरोपों के बाद NEET‑UG 2026 परीक्षा रद्द कर दी। व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर लीक हुए "गेस पेपर" ने वास्तविक पेपर के 100 से अधिक प्रश्नों से मेल खाया। इसके बाद यूनियन सरकार ने जांच CBI को सौंप दी। FAIMA की याचिका रद्दीकरण के कुछ दिनों बाद दायर की गई।
UPSC प्रासंगिकता
• नीति‑निर्माण एवं शासन: यह मामला महत्वपूर्ण परीक्षा जिम्मेदारियों को स्वायत्त एजेंसियों को सौंपने में चुनौतियों को उजागर करता है, जो GS 2 (Polity) में बार‑बार आता है।
• प्रौद्योगिकी एवं सुरक्षा: CBT मॉडल और डिजिटल लॉकिंग की मांग इस बात के महत्व को रेखांकित करती है।