अवलोकन
The joint FAO-WMO रिपोर्ट चेतावनी देती है कि extreme heat अब विश्व स्तर पर एग्रिफूड प्रणालियों के लिए एक प्रमुख खतरा बन गया है। India, अपने बड़े बारिश‑निर्भर कृषि और जल‑गहन गेहूँ और चावल पर निर्भरता के साथ, इस जोखिम के केंद्र में स्थित है।
भोजन प्रणाली पर प्रमुख प्रभाव
- फसलें: उच्च तापमान मिट्टी की नमी की हानि को तेज़ करते हैं और रबी फसलों जैसे गेहूँ के अनाज‑भरण चरण को बाधित करते हैं, जिससे जल्दी परिपक्वता और कम उपज होती है।
- पशुधन: गर्मी‑तनाव दूध और अंडे उत्पादन को कम करता है और मृत्यु दर बढ़ाता है, विशेष रूप से डेयरी और पोल्ट्री क्षेत्रों में।
- मछली पालन: बढ़ते जल तापमान से घुली हुई ऑक्सीजन कम होती है, जिससे हाइपॉक्सिया होती है और मछलियों को गहरे, ठंडे जल में प्रवास करना पड़ता है, जो मछुआरों की पहुँच से बाहर है।
- वन: गर्मी वन स्वास्थ्य को बिगाड़ती है, जंगल की आग का जोखिम बढ़ाती है और फलों, शहद और औषधीय पौधों की उपज को घटाती है।
महत्वपूर्ण आँकड़े
- लगभग विश्व के कृषि भूमि का 80 % बारिश‑निर्भर है, जिससे यह गर्मी‑विघटित वर्षा के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बन जाता है।
- The International Labour Organisation (ILO) का प्रोजेक्शन है कि 2030 तक कृषि गर्मी‑तनाव के कारण खोए गए वैश्विक कार्य घंटों का 60 % हिस्सा होगी।
- कृषि कार्यकर्ता गर्मी के कारण सामान्य नागरिक कार्यकर्ता की तुलना में 20 गुना अधिक संभावित रूप से मरते हैं।
- 2022 की हीटवेव ने पहले ही कई Indian राज्यों में गेहूँ की उपज में उल्लेखनीय कमी कर दी है।
भारत में नीति अंतर
India की MSP प्रणाली, बिजली और उर्वरकों के सब्सिडी के साथ मिलकर, किसानों को जल‑गहन गेहूँ और चावल की खेती में फँसा देती है। इन फसलों के लिए MSP से ऊपर राज्य‑स्तरीय बोनस, जलवायु चेतावनियों के बावजूद जारी हैं। पारंपरिक जलवायु‑सहनीय फसलें जैसे ...