समीक्षा
पर May 3, 2026, Nepal की नियोजित यात्रा Vikram Misri की Nepal को एक नई कूटनीतिक विवाद से ढँकी रही। Nepal ने India और China दोनों के साथ आगामी Kailash Manasarovar Yatra के बारे में “concerns” उठाए, जो विवादित Kalapani‑Limpiyadhura‑Lipulekh क्षेत्र से होकर गुजरने की योजना है। Kathmandu ने दोहराया कि यह क्षेत्र, जिसमें Lipulekh Pass शामिल है, Nepal की संप्रभुता वाला है।
मुख्य विकास
- नेपाल ने अपने concerns को MEA और बीजिंग को May 3, 2026 को औपचारिक रूप से संप्रेषित किया।
- India की MEA ने Nepal के दावे को अस्वीकार किया, यह कहते हुए कि Lipulekh Pass का दावा “historical facts” से रहित है।
- विवाद Kailash Manasarovar Yatra की योजना के साथ मेल खाता है, जो पारंपरिक रूप से उसी पर्वतीय मार्ग से गुजरता है।
- दोनों देशों ने पहले Kalapani क्षेत्र पर वार्ता की है, लेकिन एक निर्णायक समझौता अभी तक नहीं मिला।
- यह मुद्दा हिमालय में व्यापक India‑China सीमा टकराव में एक कूटनीतिक आयाम जोड़ता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
- Lipulekh Pass लगभग 5,200 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है और Kailash की ओर जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए एक द्वार है।
- नेपाल का दावा 1950 और 1960 के दशकों में जारी मानचित्रों पर आधारित है, जो पास को उसके सीमाओं के भीतर दर्शाते हैं।
- India की स्थिति 1962 के Sino‑Indian युद्ध रेखाओं और नेपाल के साथ बाद के समझौतों पर आधारित है।
- आगामी Yatra हजारों तीर्थयात्रियों को आकर्षित करने की उम्मीद है, जिससे यह मार्ग रणनीतिक रूप से संवेदनशील बन जाता है।
- कोई भी व्यवधान पर्यटन राजस्व और व्यापक India‑Nepal लोगों‑के‑बीच संबंधों को प्रभावित कर सकता है।
UPSC प्रासंगिकता
Lipulekh दावे जैसे सीमा विवाद GS2: Polity के मुख्य विषय हैं, जो India की कूटनीतिक ज्ञान की परीक्षा लेते हैं।