फ्रंट‑ऑफ़‑पैक चेतावनी लेबल पर प्रमुख विकास
FSSAI ने एक नियम का मसौदा तैयार किया है जिसमें शर्करा, नमक या संतृप्त वसा में अधिक वाले पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर लाल, षट्भुज चेतावनी लेबल लगाना शामिल है। यह प्रस्ताव Supreme Court के आदेश के बाद आया है, जिसमें नियामक को फ्रंट‑ऑफ़‑पैक चेतावनियों पर शीघ्र कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था। पोषण विशेषज्ञ Dr. Arun Gupta, NAPI के संयोजक, कहते हैं कि इस मसौदे में महत्वपूर्ण छूटें हैं जो कई अस्वस्थ उत्पादों को चेतावनी से बचा सकती हैं।
Key Developments (Bullet Points)
- लाल षट्भुज लेबल उन उत्पादों को चिन्हित करेगा जो added sugar, added salt या added saturated fat में अधिक हैं।
- चेतावनी केवल तब सक्रिय होती है जब किसी उत्पाद में इन पोषक तत्वों में **दो या अधिक** अधिक मात्रा में हों, अर्थात् केवल शर्करा में अधिक वाले उत्पाद पर लेबल नहीं लगेगा।
- Dr. Gupta एक सरल नियम की मांग करते हैं: प्रत्येक व्यक्तिगत पोषक तत्व के लिए जो सीमा से अधिक हो, एक लेबल होना चाहिए।
- वे ICMR‑NIN Dietary Guidelines 2024 के साथ सीमाओं को संरेखित करने की सिफारिश करते हैं।
- ‘added’ पोषक तत्वों के प्रयोग और लेबल के आकार को लेकर चिंताएँ उठाई गई हैं, जो nutrition table से केवल एक पॉइंट बड़ा है।
- बिलिंगुअल चेतावनियों (Hindi और English) और पैकेज के प्रमुख डिस्प्ले क्षेत्र से जुड़ी आकार की मांग की जा रही है।
Important Facts
Supreme Court के 2026 निर्देश ने केंद्र और FSSAI को 28 August 2026 को एक compliance affidavit प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया। अगली सुनवाई 10 September 2026 को निर्धारित है। भारत पहले से ही पैकेजों पर पोषण जानकारी अनिवार्य करता है, लेकिन कभी भी अनिवार्य, व्याख्यात्मक फ्रंट‑ऑफ़‑पैक चेतावनी की आवश्यकता नहीं रखी। 2022 के पहले मसौदों ने HFSS foods की अवधारणा पेश की थी, लेकिन परिभाषा अभी तक अंतिम नहीं हुई।