समीक्षा
The Ministry of Finance ने G‑Sec बाजार को गहरा करने और इक्विटी खंड में अधिक FPIs को आकर्षित करने के उद्देश्य से सुधारों का एक पैकेज प्रस्तुत किया है। उपाय PROI निवेशकों के लिए निवेश को आसान बनाने और विदेशी पूंजी के नियामक बाधाओं को सरल बनाने पर केंद्रित हैं।
मुख्य विकास
- **Liberalisation for PROIs** – संशोधित Portfolio Investment Scheme के तहत, व्यक्तिगत PROIs अब सूचीबद्ध भारतीय इक्विटीज़ में निवेश कर सकते हैं। प्रति‑कंपनी सीमा 5 % से बढ़कर 10 % हो गई है और सभी PROIs के लिए समग्र सीमा 10 % से बढ़कर 24 % हो गई है।
- **Expansion of the Fully Accessible Route (FAR)** – Fully Accessible Route के तहत पात्र प्रतिभूतियों की सूची में अब 15, 30 और 40‑वर्षीय टेनर वाले नए सरकारी बांड तथा Sovereign Green Bonds शामिल हैं।
- **Relaxation of General Route restrictions** – FPIs के लिए शॉर्ट‑टर्म निवेश, एकाग्रता और सुरक्षा‑वार सीमाओं पर लागू तीन कैप हटाए गए हैं। केंद्रीय‑सरकारी प्रतिभूतियों पर 6 % और राज्य‑सरकारी प्रतिभूतियों पर 2 % की कुल मात्रा सीमा अपरिवर्तित रहती है, पर ‘general’ और ‘long‑term’ उप‑सीमाओं को एक ही सीमा में मिलाया गया है।
- **Tax exemption on G‑Sec returns** – 1 April 2026 से, FPIs द्वारा G‑Sec पर अर्जित ब्याज और पूंजी लाभ आयकर से मुक्त होंगे। समान छूट Bank for International Settlements (BIS) को भी दी गई है।
महत्वपूर्ण तथ्य
इन सुधारों को Depar के माध्यम से लागू किया जाएगा।