समीक्षा: सरकार ने 60.72% हिस्सेदारी को IDBI Bank को Canadian firm Fairfax Financial Holdings को बेचने की मंजूरी दी। विपक्षी नेता Rahul Gandhi ने सार्वजनिक रूप से इस कदम को चुनौती दी, यह तर्क देते हुए कि सार्वजनिक बैंक राष्ट्र निर्माण के उपकरण हैं, बिक्री के लिए संपत्ति नहीं।
मुख्य विकास
- सरकार और LIC बिक्री के बाद अपनी संयुक्त स्वामित्व 95% से घटाकर 34% कर देंगे।
- Fairfax प्रति शेयर ₹81 का भुगतान करेगा, जो स्वतंत्र मूल्यांककों द्वारा निर्धारित ₹75.99 के फेयर‑वैल्यू बेंचमार्क से अधिक है।
- यह बिक्री भारतीय बैंक में सबसे बड़ा विदेशी निवेश है और विलंबित बैंक निजीकरण अभियान में एक मील का पत्थर है।
- Disinvestment of IDBI को DIPAM की प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है, जो CGD द्वारा निर्देशित है और CCEA द्वारा अनुमोदित है।
- निजीकरण के बाद कर्मचारियों ने नौकरी सुरक्षा, आरक्षण लाभ और सेवा शर्तों को लेकर चिंताएँ उठाई।
महत्वपूर्ण तथ्य
• IDBI ने सात साल पहले घाटे वाले इकाई से बदलकर पिछले वर्ष ₹9,000 crore से अधिक का लाभ कमाया, जो मुख्यतः कर्मचारियों के प्रयासों के कारण था।
• सरकार ने 2003 में संसद को कम से कम 50% स्वामित्व बनाए रखने का वादा किया, जो वादा कानून में दर्ज नहीं किया गया।
• सरकार की 30.48% हिस्सेदारी की बिक्री कीमत लगभग ₹26,620 crore है; LIC की 30.24% हिस्सेदारी का मूल्य ₹26,440 crore है।
• लेन‑देन को पूर्ण होने से पहले RBI की मंजूरी प्राप्त करनी होगी, जो FY 2026‑27 के अंत तक अपेक्षित है।