अवलोकन
देश भर में, Invasive alien species (IAS) के खिलाफ लड़ाई अभूतपूर्व प्रशासनिक और न्यायिक समर्थन प्राप्त कर रही है। राज्य वन विभाग, वन्यजीव बोर्ड और उच्च न्यायालय अब मिलकर उन प्रजातियों की पहचान, मानचित्रण, वर्गीकरण और उन्मूलन कर रहे हैं जो ecological loss पैदा करती हैं और मानव आजीविका को खतरे में डालती हैं।
मुख्य विकास (2025‑2026)
- सरकारी आदेश जो 15 संवेदनशील राज्यों में IAS हॉटस्पॉट्स के व्यवस्थित सर्वेक्षण को अनिवार्य करते हैं।
- कर्नाटक और पश्चिम बंगाल के उच्च न्यायालय अंतरिम आदेश जारी करते हैं जो कृषि भूमि को खतरे में डालने वाले विशिष्ट invasive plants के त्वरित उन्मूलन का निर्देश देते हैं।
- राज्य‑चलित eradication drives को Ministry of Environment, Forest and Climate Change (MoEFCC) के बजट के माध्यम से वित्त पोषित किया जा रहा है।
- 2025 में मीडिया रिपोर्टें IAS से जुड़े बढ़ते human‑wildlife conflict को उजागर करती हैं, जैसे उत्तरपूर्व में invasive cane toad।
महत्वपूर्ण तथ्य
पिछले बारह महीनों में, अंग्रेजी‑भाषी प्रेस ने IAS की आर्थिक लागत पर 30 से अधिक जांचात्मक लेख प्रकाशित किए हैं, जो कृषि उत्पादन में कुल ₹2,500 करोड़ का नुकसान अनुमानित करते हैं। मानचित्रण अभ्यासों ने 1,200 km² से अधिक वन भूमि को खतरे में पहचान लिया है। न्यायिक हस्तक्षेपों ने पारिस्थितिक संरक्षण को सार्वजनिक हित मुकदमे के रूप में मानने का precedent स्थापित किया है।
UPSC प्रासंगिकता
IAS चुनौती को समझना कई GS पेपरों के लिए महत्वपूर्ण है। Biodiversity loss सीधे GS3 के पर्यावरण शासन, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास विषयों से जुड़ता है। प्रशासनिक एजेंसियों और न्यायपालिका के बीच समन्वय संघीय संरचना और नीति कार्यान्वयन में न्यायालयों की भूमिका को दर्शाता है, जो GS2 (Polity) के लिए प्रासंगिक है। इसके अलावा, IAS का आर्थिक प्रभाव कृषि, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और