India ने RBI की औपचारिक नीति के रूप में inflation targeting (IT) का पूरा एक दशक पूरा किया। लक्ष्य 4% मुद्रास्फीति है, जिसमें प्लस या माइनस 2 प्रतिशत अंक की अनुमति सीमा है।
मुख्य विकास (बुलेट पॉइंट्स)
- 2026 वह वर्ष है जब RBI ने औपचारिक रूप से 4%±2% IT framework को अपनाया था, जिससे 10 वर्ष पूरे हो गए।
- RBI अपने मुख्य नीति उपकरण के रूप में repo rate का उपयोग करता है।
- जब मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ता है, तो RBI repo rate बढ़ाता है, जिससे commercial banks की ऋण दरें बढ़ती हैं।
- केंद्रीय बैंक संचार के माध्यम से सार्वजनिक inflation expectations को आकार देने के लिए भी काम करता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
IT framework 2016 में पेश किया गया, जिसने मूल्य स्थिरता के लिए एक स्पष्ट संख्यात्मक लक्ष्य निर्धारित किया। इस ढांचे के तहत RBI का दोहरा मिशन है: demand‑side दबावों को नियंत्रित करना और अपेक्षाओं को स्थिर करना। policy rate (repo rate) को समायोजित करके, RBI borrowing costs, investment और consumption को प्रभावित करता है।
पहले दशक के दौरान, RBI ने कई बार repo rate बढ़ाया, विशेष रूप से जब वैश्विक वस्तु कीमतें बढ़ीं या घरेलू मांग तेज हुई। प्रत्येक वृद्धि से घरों और कंपनियों के लिए ऋण दरें बढ़ीं, जिससे खर्च में कमी आई।
UPSC प्रासंगिकता
India के inflation‑targeting regime को समझना GS‑3 (Economy) के monetary policy, price stability और macro‑economic management से संबंधित प्रश्नों के लिए आवश्यक है। aspirants को यह नोट करना चाहिए कि संख्यात्मक लक्ष्य पारदर्शिता प्रदान करता है, नीति विश्वसनीयता में मदद करता है, और fiscal‑policy समन्वय से जुड़ता है।
मुख्य अवधारणाएँ जैसे Demand‑Side Management — ब्याज दरों, credit availability के माध्यम से समग्र मांग को नियंत्रित करना,