Indian Air Force: लचीलापन या Theatre‑isation?
उक्रेन और ईरान में हालिया युद्ध दिखाते हैं कि केवल वायु श्रेष्ठता से संघर्ष नहीं जीत सकते। भारत अब एक समान प्रश्न का सामना कर रहा है: क्या IAF को वह लचीला, गैर‑थियेटर ढांचा बनाए रखना चाहिए जो पाकिस्तान के खिलाफ काम आया, या चीन के संभावित युद्ध का सामना करने के लिए एक स्थायी theatre command अपनाना चाहिए।
मुख्य विकास
- उक्रेन की रक्षा एक नेटवर्केड एकीकृत वायु‑रक्षा पर निर्भर थी, न कि रूसी विमानों की संख्या पर।
- मित्र बलों ने ईरानी आकाश पर प्रभुत्व स्थापित किया लेकिन तेहरान को आत्मसमर्पण नहीं करा सके, यह दर्शाता है कि वायु प्रभुत्व जीत की गारंटी नहीं देता।
- Operation Sindoor के दौरान, कम‑लागत वाले ड्रोन ने भारत को इंटरसेप्टर पर मिलियन खर्च करने पर मजबूर किया, जिससे लागत‑गणित में असमानता उजागर हुई।
- IAF वर्तमान में 460‑520 लड़ाकू विमानों को PLAAF के लगभग 65 स्क्वाड्रन के विरुद्ध तैनात करता है। पहाड़ी भूभाग वायु‑अड्डे की उपलब्धता और पुनः तैनाती को सीमित करता है।
- थियेटर कमांड या एक संयुक्त समन्वय केंद्र की मांगों को वरिष्ठ IAF अधिकारियों से विरोध मिला है, जो करियर प्रभाव को लेकर चिंतित हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
1. Shahed‑type ड्रोन महंगे वायु‑रक्षा संपत्तियों को अभिभूत कर सकते हैं।
2. पिछले भारतीय अभियानों – Balakot strike (2019) और Operation Sindoor (May 2025) – ने पाकिस्तान के खिलाफ IAF की लचीलापन सिद्ध की, लेकिन यह चीन की बड़ी सेना के खिलाफ स्केल नहीं कर सकता।
3. 2020 Ladakh संकट ने संयुक्त‑बल निर्माण और ... में अंतराल उजागर किए।