On April 25, 2026 India’s ग्रिड ने रिकॉर्ड 256.1 GW की पीक डिमांड दर्ज की। इस लोड का लगभग एक‑तीहाई भाग नवीकरणीय ऊर्जा (RE) द्वारा सप्लाई किया गया। जबकि ग्रिड दिन के समय स्थिर रहा, 2 % का घाटा (4,243 MW) गैर‑सोलर घंटों में दिखा, जो बेहतर बैलेंसिंग मैकेनिज़्म की आवश्यकता को उजागर करता है।
मुख्य विकास
- पीक डिमांड 25 April पर 256.1 GW तक बढ़ी, और बाद में 19‑20 May को भी रिकॉर्ड बने।
- नवीकरणीय ऊर्जा ने पीक लोड का लगभग 33 % कवर किया।
- गैर‑सोलर घंटों में 4,243 MW (2 %) की कमी दिखी।
- डेज‑अहेड मार्केट कीमतें पीक अवधि में नियामक सीमा ₹10 per kWh तक बढ़ गईं।
- राज्य समय‑के‑दिन (ToD) टैरिफ और स्मार्ट मीटरिंग का उपयोग बढ़ा रहे हैं ताकि शाम के पीक को सपाट किया जा सके।
महत्वपूर्ण तथ्य
India’s इलेक्ट्रिसिटी डिमांड पिछले पाँच वर्षों में 37 % बढ़ी है, 183 GW December 2020 से 250 GW से अधिक April 2026 तक। लगभग 85‑90 % डिमांड DISCOM contractual supply के माध्यम से पूरी होती है। शेष 10‑15 % पावर एक्सचेंज से प्राप्त होती है, जिससे राज्यों को कीमतों की अस्थिरता का सामना करना पड़ता है।
जनरेशन क्षमता 76 % (303 GW → 532 GW) और ट्रांसमिशन लाइनों में 47 % (3,41,551 ckm → 5,01,766 ckm) वृद्धि हुई है, लेकिन वितरण बुनियादी ढांचा पीछे है। वार्षिक रूप से लगभग 13 lakh वितरण ट्रांसफॉर्मर फेल होते हैं, जिसमें केरल में 2 % से लेकर कुछ उत्तरी राज्यों में 20 % तक की फेल्योर रेट है।
UPSC प्रासंगिकता
Battery energy storage system (BESS) – इलेक्ट्रोकेमिकल स्टोरेज जो तेज़ चार्ज/डिसचार्ज कर अतिरिक्त नवीकरणीय पावर को स्टोर कर सकता है, की गतिशीलता को समझना UPSC के लिए महत्वपूर्ण है।