समीक्षा
India दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है: बढ़ती ऊर्जा मांग और बढ़ता कचरा। देश हर साल कृषि अवशेष, खाद्य कचरा, सीवेज स्लज और अन्य जैविक कचरे की बड़ी मात्रा उत्पन्न करता है। इस कचरे को ऊर्जा में परिवर्तित करने से ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया जा सकता है और आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम की जा सकती है।
मुख्य विकास
- India लगभग 750 million tonnes कृषि biomass वार्षिक उत्पादन करता है, जिसमें 230 million tonnes अतिरिक्त के रूप में वर्गीकृत है।
- The SATAT scheme ने पहले ही दिखा दिया है कि बायोमास को संपीड़ित बायोगैस में अपग्रेड किया जा सकता है, जो प्राकृतिक गैस का नवीकरणीय विकल्प है।
- दो मुख्य तकनीकें गति पकड़ रही हैं: gasification सूखे कचरे के लिए और anaerobic digestion गीले कचरे के लिए।
महत्वपूर्ण तथ्य
• Gasification 800‑1,000 °C पर कार्य करता है, जिससे syngas, बायो‑चार और टार बनते हैं। Syngas को सीधे गर्मी के लिए उपयोग किया जा सकता है, या मीथेन, मेथनॉल, एथेनॉल या हाइड्रोजन में अपग्रेड किया जा सकता है।
• बायो‑चार उप‑उत्पाद मिट्टी की उर्वरता को सुधारता है और कार्बन क्रेडिट उत्पन्न कर सकता है, जिससे ऊर्जा उत्पादन को कृषि स्थिरता से जोड़ा जाता है।
• Anaerobic digestion बायोगैस (मुख्यतः मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड) और पोषक‑समृद्ध डाइजेस्टेट उत्पन्न करता है जिसे मिट्टी सुधार के रूप में लागू किया जा सकता है।
• फीडस्टॉक को तकनीक से मिलाना महत्वपूर्ण है: सूखे अवशेष गैसिफायर के लिए उपयुक्त हैं, जबकि गीला कचरा (सीवेज, खाद्य कचरा) डाइजेस्टर के लिए आदर्श है। असंगतता दक्षता घटाती है और लागत बढ़ाती है।
UPSC प्रासंगिकता
ऊर्जा सुरक्षा, कचरा प्रबंधन और जलवायु शमन GS III (Economy, Science & Technology) में आवर्ती विषय हैं और Headline: Waste‑to‑Energy drives India’s energy security and cuts fossil imports