Overview
पहले Supreme Court Bar Association National Conference जिसका शीर्षक “Reimagining Judicial Governance: Strengthening Institutions for Democratic Justice” था, में Justice Vikram Nath ने मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाए जा सकने वाले मामलों के विशाल बैकलॉग को उजागर किया। उन्होंने जोर दिया कि मध्यस्थों की मान्यता केवल एक ही कोर्ट‑संलग्न कार्यक्रम तक सीमित नहीं होनी चाहिए बल्कि सभी न्यायिक अधिकार क्षेत्रों में मान्य होनी चाहिए।
Key Developments
- भारतीय न्यायालयों में 2.33 करोड़ से अधिक लंबित मामलों को मध्यस्थता के लिए उपयुक्त माना गया है, यह आंकड़ा High Courts से प्राप्त डेटा पर आधारित है।
- Mediation Act, 2023 को उसकी संभावनाओं के लिए सराहा गया, परन्तु कार्यान्वयन में अंतराल मौजूद हैं।
- Justice Nath, जो Mediation and Conciliation Project Committee के प्रमुख हैं, ने मध्यस्थ प्रशिक्षण में लॉ कॉलेजों के एकीकरण की मांग की।
- उन्होंने मध्यस्थ मान्यता को केवल एक ही केंद्र तक सीमित करने के खिलाफ चेतावनी दी, क्योंकि इससे टुकड़े‑टुकड़े होने की स्थिति बनती है और पेशेवरों को हतोत्साहित किया जाता है।
- मध्यस्थता की भूमिका को रिश्तों को संरक्षित करने, दोष खोजने से बचने, और केवल समझौते से अधिक “संतुलन” प्राप्त करने के रूप में उजागर किया गया।
Important Facts
• Mediation को बढ़ते pendency संकट को संबोधित करने के लिए एक व्यावहारिक और सिद्धांत‑आधारित उपकरण के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
• न्यायाधीश ने बताया कि दीर्घकालिक विवादों में पक्ष अक्सर मान्यता और भावनात्मक समापन चाहते हैं, जो मध्यस्थता के माध्यम से मुकदमेबाजी की तुलना में अधिक आसानी से प्राप्त होते हैं।
• जबकि कृत्रिम तकनीक कानूनी प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावित कर रही है, Justice Nath ने रेखांकित किया कि मध्यस्थता अभी भी मानवीय सुनवाई, धारणा और सहानुभूति पर आधारित है, जो एल्गोरिद्म‑आधारित निर्णय से अलग है।
Exam Relevance
• केस बैकलॉग के पैमाने (2.33 करोड़) को समझना GS‑2 (Polity) के प्रश्नों में न्यायिक दक्षता और सुधारों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
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