Overview
टायफाइड बुखार भारत में एक प्रमुख टायफाइड बुखार बना हुआ है। 2023 का एक अध्ययन जिसका शीर्षक ‘Burden of typhoid fever and antimicrobial resistance in India’ है, जो The Lancet में प्रकाशित हुआ, लगातार उच्च रोग बोझ और ड्रग‑रेज़िस्टेंट स्ट्रेन्स में चिंताजनक वृद्धि की रिपोर्ट करता है।
Key Developments
- भारत वैश्विक टायफाइड मामलों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रखता है, जो खराब स्वच्छता और सुरक्षित पेयजल तक सीमित पहुँच के कारण है।
- अध्ययन कई भारतीय राज्यों में MDR और XDR टायफाइड आइसोलेट्स में वृद्धि को दस्तावेज़ करता है।
- ऐम्पिसिलिन, क्लोरामफेनिकॉल और को‑ट्रायमॉक्साज़ोल जैसे पारंपरिक एंटीबायोटिक्स की प्रभावशीलता घटती दिख रही है, जिससे नए, महंगे दवाओं की ओर बदलाव हो रहा है।
Important Facts
इस रोग का कारण बनने वाला रोगजनक Salmonella typhi है। AMR के उदय ने कई प्रथम‑लाइन दवाओं को अप्रभावी बना दिया है, जिससे उपचार लागत और रोगात्मकता बढ़ी है। जबकि संक्षिप्त अंश में सटीक प्रादुर्भाव आँकड़े नहीं दिए गए हैं, अध्ययन इस बात पर ज़ोर देता है कि बोझ “उच्च” है और प्रतिरोधी स्ट्रेन्स पारंपरिक रूप से प्रभावित क्षेत्रों से बाहर फैल रहे हैं।
Exam Relevance
टायफाइड‑AMR संबंध को समझना कई UPSC पेपरों के लिए महत्वपूर्ण है। GS1 (Society & Health) में, उम्मीदवारों को संक्रामक रोग नियंत्रण, स्वच्छता, और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस के सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रभाव पर चर्चा करनी चाहिए। GS3 (Economy) में, नई एंटीबायोटिक्स की बढ़ती लागत और स्वास्थ्य बजट पर दबाव AMR के आर्थिक प्रभावों को दर्शाते हैं। यह मुद्दा GS4 (Ethics) को भी छूता है जब कमजोर जनसंख्या के लिए प्रभावी उपचार तक समान पहुँच का मूल्यांकन किया जाता है।
Way Forward
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