तमिलनाडु और मेघालय में जमीनी जैव विविधता योजनाएँ स्थानीय शासन को राष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धताओं से जोड़ती हैं
भारत की जैव विविधता आवासीय हानि और जलवायु परिवर्तन के कारण दबाव में है, जिससे शीर्ष‑से‑नीचे संरक्षण से सामुदायिक‑आधारित मॉडलों की ओर बदलाव हुआ है। जैव विविधता को ग्राम पंचायत विकास योजनाओं में सम्मिलित करना 73वें संशोधन और जैव विविधता अधिनियम को कार्यान्वित करता है, जिससे स्थानीय आजीविका को राष्ट्रीय और वैश्विक पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं से जोड़ा जाता है।
GS 3 – जैव विविधता संरक्षण को मुख्यधारा बनाने में जमीनी संस्थानों की भूमिका और ऐसे पहलों के वित्तपोषण की चुनौतियों पर चर्चा करें। (संभावित प्रश्न: ‘भारत में जैव विविधता शासन को पंचायत राज संस्थाओं को सौंपने की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करें।’)
जैव विविधता शासन और वित्तपोषण
संघीय संरचना और अधिकारों का हस्तांतरण
पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और सतत विकास
तमिलनाडु और मेघालय में जमीनी जैव विविधता योजनाएँ स्थानीय शासन को राष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धताओं से जोड़ती हैं
भारत की जैव विविधता आवासीय हानि और जलवायु परिवर्तन के कारण दबाव में है, जिससे शीर्ष‑से‑नीचे संरक्षण से सामुदायिक‑आधारित मॉडलों की ओर बदलाव हुआ है। जैव विविधता को ग्राम पंचायत विकास योजनाओं में सम्मिलित करना 73वें संशोधन और जैव विविधता अधिनियम को कार्यान्वित करता है, जिससे स्थानीय आजीविका को राष्ट्रीय और वैश्विक पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं से जोड़ा जाता है।
GS 3 – जैव विविधता संरक्षण को मुख्यधारा बनाने में जमीनी संस्थानों की भूमिका और ऐसे पहलों के वित्तपोषण की चुनौतियों पर चर्चा करें। (संभावित प्रश्न: ‘भारत में जैव विविधता शासन को पंचायत राज संस्थाओं को सौंपने की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करें।’)