समीक्षा
1 सितंबर 2019 को, Motor Vehicles (Amendment) Act लागू हुआ, जिसका उद्देश्य भारतीय सड़कों को पैदल यात्रियों, साइकिल चालकों, मोटर चालकों और वाणिज्यिक ड्राइवरों के लिए अधिक सुरक्षित बनाना था। सात साल बाद, MoRTH की 2024 की रिपोर्ट में 1.77 लाख सड़क‑दुर्घटना पीड़ितों की मृत्यु संख्या दर्ज की गई है, जो कानून और कार्यान्वयन के बीच अंतर को उजागर करती है।
Key Developments Since 2019
- हेल्मेट या सीट‑बेल्ट न पहनने जैसे उल्लंघनों के लिए दंड को कड़ा किया गया।
- Good Samaritans के लिए कानूनी सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए golden hour की व्यवस्था।
- वाहन सुरक्षा और CRS उपयोग के लिए अनिवार्य मानक।
- डेटा‑आधारित प्रवर्तन उपकरणों का परिचय, जिसमें स्पीड कैमरे और डिजिटल टिकटिंग शामिल हैं।
Important Facts
कानून के बावजूद, अनुपालन राज्यों में बहुत भिन्न है। हेल्मेट उपयोग, सीट‑बेल्ट पालन और CRS अपनाना असंगत बना हुआ है। स्कूल‑बस सुरक्षा मानक असमान हैं, और कई बच्चे अभी भी पर्याप्त सुरक्षा के बिना यात्रा करते हैं। दुर्घटना‑प्रवण “ब्लैक‑स्पॉट” अक्सर समय पर पहचाने या सुधारे नहीं जाते। आपातकालीन सेवाएँ अक्सर golden hour के भीतर दुर्घटना स्थल तक पहुँचने में विफल रहती हैं, जिससे जीवित रहने की संभावना घटती है।
Exam Relevance
यह अधिनियम कई GS पेपरों को छूता है: GS2 (Polity) कानूनी सुधारों और नागरिक अधिकारों के लिए; GS3 (Economy) सड़क मौतों की आर्थिक लागत और MoRTH की भूमिका के लिए; GS4 (Ethics) सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यक्तियों और संस्थानों की नैतिक जिम्मेदारी के लिए; और GS1 (History & Geography) यह समझने के लिए कि परिवहन बुनियादी ढांचा विकास को कैसे आकार देता है। प्रश्न नीति कार्यान्वयन की प्रभावशीलता, अंतर‑st