Nagaland University ने जलवायु‑प्रतिरोधी जंगली केला (Musa sikkimensis) की खोज की – खाद्य सुरक्षा और जैव विविधता के लिए बढ़ावा — UPSC Current Affairs | March 4, 2026
Nagaland University ने जलवायु‑प्रतिरोधी जंगली केला (Musa sikkimensis) की खोज की – खाद्य सुरक्षा और जैव विविधता के लिए बढ़ावा
Nagaland University के शोधकर्ताओं ने जलवायु‑प्रतिरोधी जंगली केला Musa sikkimensis को एक महत्वपूर्ण जर्मप्लास्म संसाधन के रूप में पहचाना, और इसके संरक्षण के लिए एक Banana Biodiversity Corridor स्थापित किया। अध्ययन इस प्रजाति की खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने, सतत कृषि को समर्थन देने, और स्वदेशी एथनो‑बोटैनिकल ज्ञान को संरक्षित करने की क्षमता को उजागर करता है, जो सभी UPSC के जैव विविधता और जलवायु‑स्मार्ट खेती विषयों से संबंधित हैं।
The research team of Nagaland University has documented the genetic diversity and climate adaptability of Musa sikkimensis , popularly known as the ‘Darjeeling banana’. Their findings, published in *Flora and Fauna*, highlight the species’ potential to strengthen food security and sustainable agriculture in the face of climate change. मुख्य विकास पूर्वोत्तर और दक्षिणी भारत में सहयोग के माध्यम से कई पहले अज्ञात जीनोटाइप की पहचान। विविध जलवायु क्षेत्रों में स्थानीय केला germplasm की मजबूत अनुकूलन क्षमता का प्रदर्शन। विश्वविद्यालय के Department of Horticulture में Banana Biodiversity Corridor की स्थापना। स्वदेशी समुदायों के लिए जंगली केले के एथनो‑बोटैनिकल महत्व की पहचान, जिसमें भोजन, रेशे, औषधि और सांस्कृतिक अनुष्ठानों में उपयोग शामिल है। महत्वपूर्ण तथ्य अध्ययन इस प्रजाति को भविष्य के केला प्रजनन के लिए आवश्यक प्रमुख लचीलापन विशेषताओं के एक महत्वपूर्ण भंडार के रूप में रेखांकित करता है। किसानों का हाइब्रिड और tissue‑culture varieties की ओर रुख जंगली जीनोटाइप के नुकसान को तेज़ कर सकता है। संभावित अनुप्रयोगों में उच्च उपज, रोग‑प्रतिरोधी किस्मों का विकास और रेशे‑आधारित सामग्री तथा स्वास्थ्य पेय जैसे नवीन मूल्य‑वर्धित उत्पाद शामिल हैं। यह कॉरिडोर in‑situ और ex‑situ रणनीतियों को मिलाकर दीर्घकालिक germplasm सुरक्षा सुनिश्चित करता है।