Overview
भारत का कृषि क्षेत्र बड़े पैमाने पर nano urea के परिचय के साथ एक नई तकनीकी धक्का देख रहा है। प्रिसिजन इनपुट के रूप में विपणन किया गया, यह बेहतर नाइट्रोजन उपयोग दक्षता, कम रनऑफ़, और पारंपरिक synthetic fertilisers पर कम निर्भरता का वादा करता है। इस रोलआउट को मजबूत policy support और fast‑tracked approvals द्वारा समर्थन मिला है। जबकि सरकार इसे Green Revolution के बाद का अगला कदम मानती है, public health implications और environmental safety संबंधी चिंताएँ अभी भी अपर्याप्त रूप से जांची गई हैं।
Key Developments
- सरकारी मंत्रालयों ने nano‑urea उत्पादन और वितरण के लिए national guidelines जारी किए हैं।
- राज्य कृषि विभाग छोटे किसानों के लिए खरीद मूल्य के up to 30% तक सब्सिडी दे रहे हैं।
- नियामक निकायों ने छह महीनों के भीतर तीन घरेलू निर्माताओं को fast‑tracked approvals प्रदान किए।
- Punjab, Maharashtra और Odisha में फ़ील्ड ट्रायल्स ने conventional urea की तुलना में 10‑15% उपज वृद्धि की रिपोर्ट की।
Important Facts
1. Efficiency claim: कहा जाता है कि Nano‑urea नाइट्रोजन उपयोग दक्षता को सामान्य 30‑40% (conventional urea के लिए) से बढ़ाकर 50‑60% कर देता है।
2. Environmental claim: नाइट्रोजन लीचिंग में कमी से जल निकायों की eutrophication कम हो सकती है।
3. Health concern: Nanoparticles जैविक झिल्लियों में प्रवेश कर सकते हैं; कृषि संपर्क के लिए दीर्घकालिक विषाक्तता डेटा सीमित हैं।
4. Regulatory gap: मौजूदा उर्वरक सुरक्षा मानक विशेष रूप से nanomaterial व्यवहार को संबोधित नहीं करते।