सुभाष चंद्रा ने व्यक्तिगत दिवालिया मामले में NCLT की पाँच‑सदस्यीय बेंच को चुनौती दी
Essel Group Chairman Subhash Chandra ने NCLT के समक्ष 2 September 2026 पर उपस्थित हुए और अपने व्यक्तिगत दिवालिया मामले को तय करने के लिए पाँच‑सदस्यीय बेंच के गठन का विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि ट्रिब्यूनल के पास ऐसी बेंच बनाने का वैधानिक अधिकार नहीं है।
मुख्य विकास
- सीनियर एडवोकेट Sasmit Patra ने NCLT आदेश को “त्रुटिपूर्ण और गलत” कहा और दावा किया कि बेंच “अधिकारहीन” है।
- पाँच‑सदस्यीय बेंच ने Nilesh Sharma के आदेश को स्थगित किया, जो विभाजित निर्णय के बाद नियुक्त तीसरे सदस्य थे।
- सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta ने असहमत लेनदारों (LIC Housing Finance, Canara Bank, Union Bank) की ओर से याचिका को पुनर्जीवित करने का अनुरोध किया, “विशिष्ट परिस्थितियों” और तीन अलग-अलग विचारों का हवाला देते हुए।
- NCLAT बेंच, जो Justice Yogesh Khanna के अध्यक्षता में थी, ने बेंच की संरचना को अलग से चुनौती देने को अस्वीकार किया और अपील को लंबित रखा।
महत्वपूर्ण तथ्य
NCLT ने चंद्रा को संपत्ति हस्तांतरित करने से रोक दिया और एक आदेश को स्थगित किया जिससे वह लगभग ₹6.5 crore के व्यक्तिगत‑गारंटी दावों को लेनदारों के लगभग ₹22,006 crore के दावों के विरुद्ध निपटाने में सक्षम होते। यह विवाद Section 79 और Section 419(5) & (6) की व्याख्या पर केंद्रित है। Patra ने तर्क दिया कि दोनों न्यायिक सदस्य, Ashok Kumar Bhardwaj और Nilesh Sharma, पुनर्भुगतान योजना पर सहमत थे, इसलिए बड़ी बेंच की आवश्यकता नहीं थी।
UPSC प्रासंगिकता
विशेषीकृत ट्रिब्यूनलों जैसे NCLT और NCLAT के कार्यप्रणाली को समझना GS‑III (Economy) और GS‑II (Polity) के कॉरपोरेट गवर्नेंस और कानूनी सुधारों के विषयों के लिए महत्वपूर्ण है। यह मामला कंपनियों के अधिनियम के तहत ट्रिब्यूनल की शक्ति और दिवालिया कानून की व्याख्या को भी उजागर करता है।