2025 की शुरुआत में Uttarakhand, Rajasthan, Maharashtra और Delhi में सड़कों, मॉल और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर वृक्ष हटाने के खिलाफ कई विरोध प्रकट हुए। कार्यकर्ता historic Chipko Movement को याद करते हैं, NGT के कड़े प्रवर्तन की मांग करते हैं, और compensatory afforestation की प्रभावशीलता पर प्रश्न उठाते हैं। ये विरोध अनियंत्रित वृक्ष कटाई के पारिस्थितिक, जलवायु और आजीविका प्रभावों को उजागर करते हैं।
Key Developments
- मार्च 2025: Dehradun‑Rishikesh road को चौड़ा करने के लिए 4,400 से अधिक पेड़ों को हटाने की योजना ने Dehradun के Parade Ground में शोक‑थीम वाले विरोध को प्रेरित किया।
- 2025‑2026: Jaipur के नागरिकों ने हवाई अड्डे के पास एक मॉल के लिए ~600 पेड़ों की कटाई के खिलाफ ‘Dol Ka Badh’ आंदोलन बनाया।
- 2025: Pune bench of the NGT ने Maharashtra में Simhastha Kumbh Mela परियोजना के लिए 5,000 पेड़ों की कटाई को रोक दिया।
- 2023: NGT ने ‘Nature Lovers of Hyderabad’ के पक्ष में फैसला दिया, जिससे सड़कों के विस्तार के लिए नियत हजारों प्राचीन बैनियन पेड़ों को बचाया गया।
- 10 May 2026: दिल्ली के Ridge के 673.32 हेक्टेयर को ‘reserved forest’ घोषित किया गया, हालांकि सरकार गैर‑स्थानीय प्रजातियों को लगाने की योजना बना रही है।
Important Facts
हाल ही में एक RTI के अनुसार, पिछले पाँच वर्षों में Uttarakhand में 83,000 पेड़ (जिसमें साल, हल्दु, खैर, शिशम, जामुन और बैनियन शामिल हैं) काटे गए, जिनमें कई 200 साल से अधिक पुराने हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ये आँकड़े पौधों, झाड़ियों और घास को बाहर रखते हैं, जिससे वास्तविक नुकसान कम आँका गया है। Avenue trees जैसे पीपल, नीम और बैनियन सांस्कृतिक और आजीविका लाभ भी प्रदान करते हैं। उनकी हटाने से urban heat island effect बढ़ता है, विशेषकर Dehradun और Mussoorie जैसे हिल स्टेशन में।
Exam Relevance
ये घटनाएँ पर्यावरणीय शासन, संघ‑राज्य समन्वय और सतत विकास के प्रतिच्छेदन को दर्शाती हैं—जो GS III (Environment) और GS II (Polity) के मुख्य विषय हैं।