The National Medical Commission (NMC) has officially denotified the 2023 Maintenance of Standards of Medical Education Regulations (MSMER). This move removes a set of rules that allowed fines of up to ₹5 lakh on individual faculty and administrators for providing false information. While the MARB can still fine institutions up to ₹1 crore under the 2023 Establishment of Medical Institutions, Assessment and Rating Regulations, the withdrawal of MSMER raises questions about regulatory effectiveness.
Key Developments
- MSMER, जो ‘भूत फैकल्टी’ और ‘भूत रोगियों’ को लक्षित करता था, पूरी तरह से वापस ले लिया गया है।
- व्यक्तिगत स्तर पर ₹5 लाख तक के जुर्माने अब लागू नहीं किए जा सकते।
- 2023 Postgraduate Medical Education Regulations अभी भी प्रभावी हैं, जो पीजी कॉलेजों के लिए फैकल्टी‑स्तर के दंड को बरकरार रखती हैं।
- MARB के पास संस्थानों पर ₹1 करोड़ तक का जुर्माना लगाने का अधिकार बना रहता है, लेकिन यह केवल संस्थागत स्तर पर है।
- MARB की 15‑दिन की अपील समय सीमा और NMC Act के तहत 60‑दिन की अवधि के बीच संभावित कानूनी टकराव।
- RTI‑आधारित पूछताछ ने MARB की मूल्यांकन रिपोर्टों में असंगतियों और उनकी सार्वजनिक उपलब्धता में कमी को उजागर किया।
Important Facts
Penalty Structure
MSMER के तहत, फैकल्टी को अधिकतम ₹5 लाख तक का दंड लगाया जा सकता था। 2023 नियमों के तहत MARB का अधिकार संस्थानों पर अधिकतम ₹1 करोड़ का जुर्माना लगाने की अनुमति देता है, जिससे सीमा अधिक होती है लेकिन लक्ष्य व्यापक हो जाता है।
Appeal Mechanism
MARB के नियम एक दंड के खिलाफ अपील करने के लिए 15‑दिन की अवधि निर्धारित करते हैं, जो NMC Act में निर्धारित 60‑दिन की अवधि के साथ टकरा सकती है। यह ओवरलैप प्रवर्तन में देरी कर सकता है।
Transparency Issues
2024 में, CIC ने नोट किया कि MARB ने औपचारिक रूप से अपने रेटिंग रिपोर्टों का मूल्यांकन या प्रकाशन नहीं किया था। अक्टूबर 2025 में एक संशोधित उत्तर में भी आवश्यक दस्तावेज़ नहीं थे, जबकि 2023 MARB नियम सार्वजनिक रूप से मूल्यांकन की जानकारी का खुलासा अनिवार्य करते हैं।