समीक्षा
9/11 हमलों के बाद से, आतंकवाद की प्रकृति और राष्ट्रों की प्रतिक्रिया में नाटकीय परिवर्तन आया है। भारत, जिसने 1990 के दशक की शुरुआत में अपना पहला बड़ा सीमा‑पार आतंकवादी घटना का सामना किया, एक मुख्यतः प्रतिक्रियात्मक रुख से एक सक्रिय, सीमा‑पार दृष्टिकोण की ओर बढ़ा। यह बदलाव 2014 के बाद स्पष्ट हुआ, जो 2025 Operation Sindoor और PRAHAAR नीति के लॉन्च के साथ समाप्त हुआ।
मुख्य विकास (बुलेट पॉइंट्स)
- 2016: जेएम हमले के बाद उरी में पहली सर्जिकल स्ट्राइक्स।
- 2019: भारतीय वायु सेना ने बालाकोट में एक जेएम प्रशिक्षण शिविर को बॉम्ब किया, जो पहली सीमा‑पार हवाई कार्रवाई थी।
- 2025: Operation Sindoor (6‑7 मई) ने LeT और JeM के नेतृत्व को निशाना बनाया, उनके मुख्यालय और पाकिस्तानी संपत्तियों को नष्ट किया।
- 2026: PRAHAAR का अनावरण, एक व्यापक राष्ट्रीय काउंटर‑टेरर ढांचा।
महत्वपूर्ण तथ्य
सीमा‑पार आतंकवाद के प्रति भारत की प्रारंभिक प्रतिक्रिया कूटनीतिक विरोध और कभी‑कभी की गिरफ्तारी तक सीमित थी। 2001 संसद हमले के बाद Operation Parakram ने दिखाया कि परमाणु‑सशस्त्र पड़ोसियों के साथ दंडात्मक कार्रवाई में कठिनाइयाँ होती हैं। बाद के हमले—जैसे 2008 मुंबई 26/11 हमले, 2016 उरी स्ट्राइक, और 2025 पहलगाम विस्फोट—ने एक सिद्धांतात्मक बदलाव को प्रेरित किया, जिससे किसी भी पाकिस्तान‑समर्थित आतंकवादी कार्य को युद्ध के कार्य के रूप में माना गया।
UPSC प्रासंगिकता
भारत की काउंटर‑टेरर विकास को समझना GS2 (राजनीति) और GS3 (सुरक्षा) के लिए आवश्यक है। उम्मीदवारों को यह नोट करना चाहिए कि अंतर्राष्ट्रीय घटनाएँ जैसे 9/11 —