भारतीय नौसेना का Project 17A लगातार देरी का सामना कर रहा है, जबकि 30 April 2026 को INS Mahendragiri को डिलीवर किया गया। यह कार्यक्रम मौजूदा Shivalik फ्रिगेट्स को पूरक करने और Project 17B के मार्ग को प्रशस्त करने के लिए बनाया गया है, और यह स्वदेशी सप्लाई चेन, ऑडिट निगरानी, और समुद्री रणनीति में अंतराल को उजागर करता है।
Key Developments (as of 2026)
- सात में से छह फ्रिगेट 17 महीनों में डिलीवर किए गए, लेकिन अंतिम जहाज़ अभी भी इंजन और सेंसर जैसे महत्वपूर्ण घटकों की कमी के कारण लंबित है।
- CAG ने पहले के युद्धपोत वर्गों में सैकड़ों डिज़ाइन परिवर्तन को चिन्हित किया, जो प्रणालीगत प्रोजेक्ट‑मैनेजमेंट त्रुटियों को दर्शाता है।
- Project 17A में घटकों के मूल्य का केवल 75 % स्वदेशी है; बाकी, विशेषकर हाई‑एंड रडार और सोनार, आयातित हैं, जिससे एकीकरण में देरी होती है।
- 2025 की CAG रिपोर्ट ने चेतावनी दी कि प्लेटफ़ॉर्म बिना समानांतर समर्थन बुनियादी ढांचे (जैसे सेंसर नेटवर्क, रखरखाव सुविधाएँ) के इन्डक्शन किए जा रहे हैं।
- भारत का समुद्री डोमेन‑अवेयरनेस नेटवर्क — Chain of Static Sensors — अभी भी विदेशी रडार हार्डवेयर पर निर्भर है, जिससे इसकी प्रभावशीलता सीमित रहती है।
Important Facts
• कुल कार्यक्रम लागत: ₹45,000 crore.
• नियोजित फ्रिगेट्स की संख्या: seven.
• मूल्य के अनुसार स्वदेशी सामग्री: 75 % (बाकी 25 % विदेश से आयात)।
• डिलीवरी समयरेखा: 17 महीनों में छह जहाज़; अंतिम जहाज़ निर्धारित कमीशनिंग तिथि से आगे देरी।
Exam Relevance
देरी उच्च‑प्रौद्योगिकी रक्षा परियोजनाओं में स्वदेशी घटकों की चुनौतियों को उजागर करती है। अभ्यर्थियों को समझना चाहिए कि CAG द्वारा किए गए ऑडिट निष्कर्ष नीति समीक्षाओं को कैसे प्रेरित कर सकते हैं। रणनीतिक पृष्ठभूमि में भारतीय महासागर शामिल है, जो भारत के 80 % ऊर्जा आयात का मार्ग है और बढ़ते खतरे का मंच है।