अवलोकन
27 जुलाई 2026 को, Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act में एक बिल के माध्यम से संशोधन किया गया, जिसे Minister of State for DoPT Jitendra Singh ने लोक सभा में पेश किया। यह संशोधन एक महीने लंबे छात्र विरोध के बाद आया, जो एक कथित NEET‑UG पेपर लीक के कारण हुआ।
मुख्य विकास
- राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन अब किसी भी Court of Session को Act के तहत अपराधों के लिए Special Fast Track Court के रूप में designate कर सकते हैं।
- इन कोर्टों में परीक्षण को दैनिक आधार पर चलाना होगा और चार्जशीट दाखिल करने के तीन महीने के भीतर समाप्त करना होगा।
- केंद्र आवश्यकतानुसार Special Task Force (STF) स्थापित कर सकता है।
- पेपर‑लीक मामलों की जांच दो महीने के भीतर समाप्त होनी चाहिए।
- राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश Act के तहत मामलों के लिए एक या अधिक Special Public Prosecutors नियुक्त कर सकते हैं।
- अपराधों के लिए जेल की सज़ा और जुर्माने बढ़ाए गए हैं (सटीक आंकड़े निर्दिष्ट नहीं)।
- किसी भी निर्णय, सज़ा या आदेश के खिलाफ अपील Division Bench of the High Court में जाएगी और उसे प्रवेश के तीन महीने के भीतर निपटाया जाना चाहिए।
महत्वपूर्ण तथ्य
संशोधन को Union Cabinet ने शुक्रवार, 26 जुलाई 2026 को अनुमोदित किया। यह परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही की मांग करने वाले तीव्र विरोधों के बीच anti‑paper‑leak ढांचे को मजबूत करने का लक्ष्य रखता है।
UPSC प्रासंगिकता
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