सारांश
3 December 2026 को, Rajnath Singh ने ‘Raksha’ लॉन्च किया। यह दस्तावेज़ 2036 तक रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और स्वदेशी रक्षा निर्माण के लिए भारत की दृष्टि को रेखांकित करता है।
मुख्य विकास
- संयुक्त अभ्यास, प्रशिक्षण और क्षमता‑निर्माण के माध्यम से द्विपक्षीय और बहुपक्षीय रक्षा संबंधों को सुदृढ़ करना।
- Make‑in‑India रक्षा निर्यात को बढ़ावा देना ताकि भारत को एक विश्वसनीय वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित किया जा सके।
- समुद्री सुरक्षा पर जोर देना, भारत को Net Security Provider और Indian Ocean Region में प्रथम प्रतिक्रिया देने वाला बनाकर।
- रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों (PSUs) को आयात निर्भरता कम करने और स्वदेशी प्लेटफ़ॉर्म पर ध्यान केंद्रित करने का निर्देश दिया गया।
- बेल्जियम ने पाकिस्तान के साथ कोई रक्षा सहयोग न करने की आश्वासन दी, जो तकनीकी हस्तांतरण को लेकर India की चिंता को दर्शाता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
यह ढांचा कई स्तंभों की पहचान करता है:
- Strategic Engagement: राष्ट्रीय सुरक्षा लक्ष्यों को सक्रिय अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के साथ संरेखित करना।
- Indigenous Export Promotion: घरेलू विकसित प्लेटफ़ॉर्म को वैश्विक बाजारों के लिए उपयोग करना।
- Maritime Security: Indian Ocean में भारत की स्थिरकारी शक्ति के रूप में भूमिका को सुदृढ़ करना।
- Capacity Building: मित्र राष्ट्रों के साथ संयुक्त अभ्यास, प्रशिक्षण कार्यक्रम और प्रौद्योगिकी साझाकरण का विस्तार करना।
रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी लॉन्च में उपस्थित हुए।
UPSC प्रासंगिकता
रक्षा कूटनीति को समझना सुरक्षा संरचना और स्वदेशी निर्माण से संबंधित GS‑2 (Polity) और GS‑3 (Economy) प्रश्नों के लिए आवश्यक है। स्वदेशी रक्षा निर्यात पर जोर – अन्य देशों को घरेलू रूप से निर्मित रक्षा उपकरणों की बिक्री, ...