RBI और Government ने धोखेबाज़ डिजिटल लोन ऐप्स को रोकने के लिए बहु‑आयामी उपाय लागू किए — UPSC Current Affairs | March 17, 2026
RBI और Government ने धोखेबाज़ डिजिटल लोन ऐप्स को रोकने के लिए बहु‑आयामी उपाय लागू किए
RBI, Union Government के समर्थन से, धोखेबाज़ डिजिटल लोन ऐप्स को रोकने के लिए व्यापक दिशानिर्देश, सार्वजनिक DLA निर्देशिका, और साइबर‑क्राइम रिपोर्टिंग तंत्र जारी कर चुका है। ये कदम उपभोक्ता संरक्षण को सुदृढ़ करते हैं, कई मंत्रालयों को शामिल करते हैं, और UPSC GS III और GS II की तैयारी के लिए आवश्यक विकसित होते नियामक परिदृश्य को दर्शाते हैं।
Government और Central Bank ने धोखेबाज़ डिजिटल लेंडिंग पर नियंत्रण कड़ा किया सारांश RBI और Union Government ने उपभोक्ताओं को अवैध मोबाइल‑लोन एप्लिकेशन से बचाने के लिए नियामक और प्रवर्तन उपायों का एक समूह पेश किया है। ये कदम डिजिटल लेंडिंग के नियामक ढाँचे को सुदृढ़ करने, ग्राहक सुरक्षा को बढ़ाने, और एक सुरक्षित डिजिटल‑लेंडिंग इकोसिस्टम सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखते हैं। मुख्य विकास Regulatory Guidelines (effective 01‑07‑2025) : RBI द्वारा स्थापित Working Group on Digital Lending ने सिफ़ारिशें प्रस्तुत कीं, जिससे सभी Regulated Entities (REs) के लिए व्यापक दिशानिर्देश तैयार हुए। अनुपालन की निगरानी supervisory sampling के माध्यम से की जाती है, और गैर‑अनुपालन पर सुधार या प्रवर्तन कार्रवाई की जाती है। Digital Lending Apps Directory : RBI ने अपनी वेबसाइट पर DLAs की सार्वजनिक निर्देशिका लागू की है। उपभोक्ता यह सत्यापित कर सकते हैं कि कोई ऐप मान्यता प्राप्त RE से जुड़ा है या नहीं। Blocking of Fraudulent Apps : MeitY उन ऐप्स को ब्लॉक करेगा जो IT Act की Section 69A का उल्लंघन करते हैं, 2009 Rules के तहत उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए। Collaboration with Internet Intermediaries : प्रमुख प्लेटफ़ॉर्म और मैसेजिंग सेवाओं को तकनीक‑आधारित जांच और रीयल‑टाइम प्रवर्तन लागू करने का निर्देश दिया गया है, ताकि अवैध लोन ऐप विज्ञापनों को रोका जा सके, विशेष रूप से जो ऑफ़शोर से आते हैं। Cyber‑Crime Reporting Mechanisms : I4C ने राष्ट्रीय साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) और हेल्पलाइन 1930 लॉन्च किया है, जिससे नागरिक धोखेबाज़ ऐप्स की रिपोर्ट कर सकें। Bank‑Led Grievance Redressal : बैंकों द्वारा सार्वजनिक‑सामना करने वाले SACHE का उपयोग किया जाता है