14 October 2026 को भारतीय रुपये ने 95.17 प्रति US$ पर बंद किया, जो पिछले क्लोज़ से 19 पैसे की बढ़ोतरी है। यह चौथी लगातार सराहना सत्र को दर्शाता है, जो RBI के सक्रिय उपायों और कमजोर डॉलर के कारण हुआ।
मुख्य विकास
- RBI ने तेल मार्केटिंग कंपनियों के लिए एक विशेष विंडो पेश की ताकि डॉलर की मांग को स्पॉट मार्केट से हटाया जा सके।
- विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव्स पर नियमों को कड़ा किया गया ताकि रुपये पर सट्टा दांव को रोका जा सके।
- बैंकों को निर्देश दिया गया कि $2 million से अधिक डॉलर खरीद पर 20% रिज़र्व रखें।
- कमजोर घरेलू इक्विटी बाजारों ने रुपये की संभावित बढ़त को सीमित किया; Sensex में 251.89 points गिरावट आई और Nifty में 99.25 points की गिरावट हुई।
महत्वपूर्ण तथ्य
- इंटर‑बैंक ओपनिंग रेट: 95.05 प्रति US$; इंट्राडे हाई: 94.76, लो: 95.19.
- पिछले चार सत्रों में रुपये ने कुल 171 paise की बढ़ोतरी की।
- थोक मूल्य‑आधारित महंगाई (WPI) सितंबर 2026 में 11.39% तक बढ़ी, जो अगस्त में 9.92% से बढ़ी, और यह खाद्य, निर्मित वस्तुओं और ईंधन‑पावर कीमतों के कारण हुआ।
- डॉलर इंडेक्स 102.23 पर था, जो 0.05% बढ़ा।
- ब्रेंट क्रूड $106.37 प्रति बैरल पर ट्रेड हुआ, जो 0.64% बढ़ा।
- FIIs ने 13 Oct 2026 को Rs 1,305.13 crore मूल्य के इक्विटीज़ बेचे।
UPSC प्रासंगिकता
यह उदाहरण दर्शाता है कि RBI कैसे बाजार‑हस्तक्षेप उपकरणों (विशेष विंडो, रिज़र्व आवश्यकताएँ, डेरिवेटिव नियम) का उपयोग करके विनिमय‑दर की अस्थिरता को प्रबंधित करता है। बाहरी कारकों के बीच संबंध को समझना