Overview
भारत में राजनीतिक माहौल एक नई डिफेक्शन लहर देख रहा है। Six Shiv Sena (UBT) MPs Eknath Shinde फेक्शन में जा रहे हैं, जो अब ठीक पार्टी की लोकसभा शक्ति के दो‑तिहाई को दर्शाता है। यह बदलाव को मर्जर के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जो Tenth Schedule के तहत है। यह कदम anti‑defection फ्रेमवर्क की प्रभावशीलता और सत्ताधारी NDA पर संसद में उसके प्रभाव को लेकर गंभीर प्रश्न उठाता है।
Key Developments
- Six Shiv Sena (UBT) MPs Eknath Shinde फेक्शन में शामिल होने की चाह रखते हैं, जो कानूनी मर्जर के लिए दो‑तिहाई सीमा को पूरा करता है।
- 2003 में anti-defection law में किया गया संशोधन “स्प्लिट” प्रावधान को हटा कर केवल मर्जर मार्ग छोड़ गया।
- इसी तरह के डिफेक्शन Trinamool Congress (TMC) (28 में से 20 लोकसभा MPs) और Aam Aadmi Party (AAP) (राज्यसभा सदस्यों की संख्या 10 से घटकर 3) में भी हुए हैं।
- तीन TMC राज्यसभा सदस्य — Sukhendu Sekhar Ray, Sushmita Dev और Prakash Chik Baraik — ने इस्तीफा दिया, जिससे विपक्ष की संख्या और कमजोर हुई।
- Supreme Court ने अभी तक यह नहीं कहा है कि मर्जर केवल विधायी पार्टी तक सीमित हो सकता है या नहीं, बिना मूल पार्टी की सहमति के।
Important Facts
- anti‑defection law एक सदस्य को अयोग्य कर देता है जो स्वेच्छा से अपने पार्टी से इस्तीफा देता है या मतदान के दौरान पार्टी व्हिप का उल्लंघन करता है।
- वर्तमान कानून के तहत, अयोग्यता केवल तब टाली जा सकती है जब कम से कम दो‑तिहाई पार्टी के विधायकों की सहमति से वह किसी अन्य पार्टी के साथ मर्जर करे।