भारत का शिपिंग सेक्टर, यद्यपि छोटा है, उसके ऊर्जा आयातों के लिए महत्वपूर्ण है जो Strait of Hormuz के माध्यम से प्रवाहित होते हैं। हालिया तनावों के साथ Iran ने यह उजागर किया है कि इस गलियारे में व्यवधान भारत की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को कैसे प्रभावित कर सकते हैं।
मुख्य विकास
- ईरान‑सेट Persian Gulf Strait Authority Strait में जहाज़ों की आवाज़ाही संभालने वाली एकमात्र एजेंसी बन जाएगी।
- समझौता ज्ञापन (MoU) ईरान‑संबंधित जहाज़ों पर प्रतिबंध हटाने और Oman तथा अन्य खाड़ी देशों के साथ समुद्री प्रशासन पर वार्ता शुरू करने का प्रस्ताव रखता है।
- भारत की LPG strategy में विश्वसनीय आकस्मिक योजना की कमी है, जिससे रणनीतिक कमजोरी उजागर होती है।
- संयुक्त अरब अमीरात “Zero Hormuz dependency” रणनीति को आगे बढ़ा रहा है।
- Chabahar जैसे प्रोजेक्ट को किनारे रखा गया, जिससे भारत के विकल्प सीमित हो गए।
महत्वपूर्ण तथ्य
- भारतीय समुद्री कर्मी हर साल विदेशी मुद्रा में billions of dollars उत्पन्न करते हैं।
- Strait में व्यवधान न केवल तेल बल्कि LPG, डीज़ल और अन्य ईंधन आपूर्ति को भी प्रभावित कर सकते हैं।
- भारत की वर्तमान आपूर्ति श्रृंखला कड़ी समय‑सारणी के साथ सीमित दीर्घकालिक भंडारण क्षमता रखती है।
- ईरान का जलमार्ग पर नियंत्रण रणनीतिक लीवर के रूप में उपयोग किया जा सकता है, जैसा कि हालिया संघर्ष में देखा गया।
UPSC प्रासंगिकता
यह मुद्दा कई GS विषयों को छूता है: GS3 – Economy (ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार, प्रतिबंध), GS2 – Polity (अंतर्राष्ट्रीय समझौते, MoU, कूटनीतिक वार्ता), और GS1 – Geography (Strait का रणनीतिक स्थान)। भू-राजनीति और व्यापार के अंतर्संबंध को समझना राष्ट्रीय सुरक्षा, संसाधन निर्भरता, और विदेश नीति से जुड़े प्रश्नों के उत्तर देने में मदद करता है।
आगे का मार्ग
- एक strategic contingency plan विकसित करें f