Supreme Court ने ब्राह्मण समुदाय की याचिका में घृणा भाषण पर सार्वभौमिक प्रतिबंध पर ज़ोर दिया — UPSC Current Affairs | March 20, 2026
Supreme Court ने ब्राह्मण समुदाय की याचिका में घृणा भाषण पर सार्वभौमिक प्रतिबंध पर ज़ोर दिया
20 March 2026 को, Supreme Court ने यह फैसला सुनाया कि घृणा भाषण के विरोध को सार्वभौमिक होना चाहिए, न कि किसी एक समुदाय तक सीमित, जबकि ब्राह्मण समुदाय से संबंधित याचिका की सुनवाई की जा रही थी। Justice B.V. Nagarathna ने प्रतिक्रियात्मक दृष्टिकोणों के खिलाफ चेतावनी दी और याचिकाकर्ता को याचिका वापस लेने की अनुमति दी, जिससे व्यापक सामाजिक सहनशीलता की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया।
Overview 20 March 2026 को, Supreme Court ने घृणा भाषण की प्रकृति पर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। Mahalingam Balaji द्वारा दायर याचिका, जिसमें ब्राह्मण समुदाय को लक्षित अपमानजनक टिप्पणी के खिलाफ थी, की सुनवाई के दौरान Justice B.V. Nagarathna ने ज़ोर दिया कि घृणा भाषण के खिलाफ लड़ाई सभी समुदायों को शामिल करनी चाहिए। Key Developments Justice Nagarathna ने सवाल किया कि कोई एकल समुदाय क्यों सुरक्षा की मांग करे, और एक सार्वभौमिक रुख अपनाने की अपील की: “कोई भी घृणा भाषण में लिप्त नहीं होना चाहिए।” याचिकाकर्ता ने 'Brahmophobia' शब्द बनाया था और इसे दंडनीय जाति‑आधारित भेदभाव के रूप में मान्यता देने की मांग की थी। Court ने बताया कि घृणा भाषण शिक्षा, सहनशीलता और धैर्य जैसे व्यापक सामाजिक मुद्दों को प्रतिबिंबित करता है। Justice Nagarathna ने याचिकाकर्ता को लचीलापन विकसित करने और प्रतिक्रियात्मक उपायों से बचने की सलाह दी, यह नोट करते हुए कि कुछ उकसावे को अनदेखा करने से वे स्वाभाविक रूप से समाप्त हो सकते हैं। याचिकाकर्ता को याचिका वापस लेने की अनुमति दी गई, जिससे विशेष मुकदमा समाप्त हो गया। Important Facts Bench Head: Justice B.V. Nagarathna. Issue: क्या ब्राह्मण समुदाय को लक्षित घृणा भाषण को एक विशिष्ट कानूनी अपराध माना जा सकता है। Legal Concept Raised: याचिकाकर्ताओं ने सुझाव दिया कि घृणा भाषण को एक