Supreme Court ने आयकर अधिनियम की धारा 147 और 148 के तहत कर मूल्यांकन को पुनः खोलने की स्पष्टता दी (2026)
उच्चतम न्यायालय ने एक हालिया निर्णय (2026 LiveLaw SC 488) में आयकर मूल्यांकन को पुनः खोलने की शक्ति की सीमा को समझाया, यह रेखांकित करते हुए कि यह अधिकार केवल जानबूझकर छुपाने के मामलों तक सीमित नहीं है बल्कि किसी भी स्थिति में लागू होता है जहाँ Section 147 मानदंड पूरे होते हैं। यह स्पष्टता Sanand Properties Pvt. Ltd. (SPPL) और उसके एक आवास परियोजना के लिए गठित Association of Persons (AOP) से प्राप्त राजस्व के हिस्से के विवाद से उत्पन्न हुई।
Key Developments
- अदालत ने कहा कि मूल्यांकन को पुनः खोलने की शक्ति तब सक्रिय होती है जब Assessing Officer के पास ठोस सामग्री के आधार पर "reason to believe" हो कि आय मूल्यांकन से बच गई है।
- "Escaped assessment" में अंडर‑असेसमेंट, कम कर दरें, अत्यधिक रिहाई, या बढ़े हुए कटौतियाँ शामिल हैं – केवल अनदेखी आय नहीं।
- Two pre‑conditions for invoking Section 148 are: (a) reason to believe income escaped assessment, and (b) recorded reasons before issuing the notice.
- Supreme Court ने यह तर्क खारिज किया कि Revenue की “change of opinion” अमान्य है, यह नोट करते हुए कि SPPL की आय की प्रकृति पर कोई पूर्व राय नहीं बनी थी।
- निर्णय ने पुष्टि की कि SPPL का 35 % ग्रॉस कलेक्शन का हिस्सा कर योग्य राजस्व है, न कि कर मुक्त लाभ का हिस्सा।
Important Facts
मूल मामले में, AOP समझौते की धारा 7 में निर्धारित किया गया था कि SPPL को तुरंत ग्रॉस बिक्री आय का 35 % प्राप्त होगा, जबकि शेष 65 % परियोजना खर्चों को कवर करेगा। आयकर विभाग ने तर्क दिया कि यह हिस्सा ग्रॉस राजस्व का स्थिर भाग है, इसलिए कर योग्य। पहले के ट्रिब्यूनलों ने इसे कर मुक्त लाभ हिस्से के रूप में माना था, जिससे विभाग ने अपील की।
अदालत ने देखा कि Revenue ने SPPL की घोषणा को बिना आय की मूल प्रकृति की जाँच किए सीधे स्वीकार कर लिया था। जब नई जानकारी से पता चला कि आय कर योग्य राजस्व है, तो Revenue को पुनः खोलने का अधिकार था।